राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा खतरे में, पांच मोरों की संदिग्ध मौत

shailendra gupta
शिवपुरी। शिवपुरी शहर 15 किमी दूर स्थित ग्राम झलवासा में पूरे जिले सर्वाधिक मोर पाई जाती हैं। लेकिन इन दिनों मोरों में एक भीषण बीमारी पनप गई है। जिसके कारण अभी तक पांच मोरों की मौत हो चुकी है जबकि एक मोर जीवन और मौत से संघर्ष कर रही है।

वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अभी भी इस बीमारी से अनभिज्ञ बने हुए हैं। यह बीमारी का लक्षण यह है कि पहले मोर के मुंह पर सूजन आती है और उसके बाद उसकी आंखे फूट जाती हैं। मुंह पर सूजन आने के कारण मोर का खाना-पीना बंद हो जाता है और आंख फूट जाने से वह अंधी हो जाती हैं और तड़प-तड़प अपनी जान दे देती है।

ग्राम झलवासा के ग्रामीण तीन दिन से बीमार एक मोर की देखभाल में लगे हुए हैं। लेकिन अभी तक वन विभाग का कोई भी कर्मचारी और वन विभाग के डॉक्टर इन मोरों की स्थिति देखने नहीं पहुंचे हैं। वन विभाग के डॉ. जितेन्द्र जाटव से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि यह बीमारी मोरों के शरीर में पहले से ही रहती है और इंफेक्शन के कारण बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि गर्मी अधिक होने के कारण वह इस बीमारी से ग्रसित हो जाती हैं।

लेकिन इस बीमारी के कारण मोरों के मरने का चांस कम होता है। क्योंकि मोरों के शरीर में पसीना निकालने की ग्रंथियां नहीं रहती हैं और जब गर्मी अधिक होती है तो वह ठण्डी जगहों पर नहीं पहुंच पाती और पेड़ के नीचे कोई मनुष्य बैठे होते हैं तो वह पेड़ पर भी नहीं जातीं हैं। जिस कारण उनके शरीर में इंफेक्शन हो जाता है और वह इस बीमारी का शिकार हो जाती हैं।  लेकिन वह इस बीमारी से मरती नहीं है। अगर वह मर रही हैं तो उनको देखना पड़ेगा कि वह किस बीमारी से ग्रसित हैं। फिलहाल वन इस मामले की जांच में जुटा है कि मोरों की मौत आखिर किस वजह से हुई?

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