कोलारस उप चुनाव: गांव के बाहर लगाया बैनर, चुनाव का बहिष्कार

कोलारस। अनुविभाग अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत देहरदा गणेश के गांव मझरा टपरियन के ग्राम वासियों ने कोलारस विधानसभा में होने वाले उपचुनाव का पूर्ण रूप से वहिष्कार करने का फैसला लिया है। इसी के चलते गांव के बाहर एक बड़ा बैनर भी लगा दिया है और उस पर लिख दिया है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही हितग्राही योजना का हमे लाभ नही मिल रहा है इस लिए हम सभी ग्रामीण विधानसभा उपचुनाव का बहिष्कार करते है।

ग्रामीणों ने सामुहिक रूप से मीडिया कर्मियो से बात करते हुए बताया कि केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही हितग्राही योजनाओं का हमें आज तक कोई लाभ नहीं मिला है इसलिए हम सभी ग्रामवासी उपचुनाव का बहिष्कार कर रहे है यह फैसला हमारी मझरा टपरियन कि पंचायत ने फैसला लिया इस गांव में करीब 150 परिवार रहते है इस गांव की कुल आबादी 1000 के लगभग है करीब 500 मतदाता है। ग्रामीणो ने आरोप लगाते हुए कहा की हमे एक भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान नही मिला है न ही उज्ज्वल योजना के तहत गांव में किसी को गैस कनेक्शन मिला है और इस गांव के बच्चे देहरदा गणेश पडऩे जाते है गांव करीब 3 किलोमीटर दूर है न स्कूल जाने को साइकिल मिली है बच्चे स्कूल दूर होने की बजह से स्कूल जाने से परहेज कर रहे है। 

ग्रामीणो का कहना है कि जब हमे पूर्ण रूप से कोई सरकारी योजना का लाभ नही मिल रहा तो हम क्यू मतदान करे क्योकि हमारा वोट डालना न डालना बेकार है। जब हमारे द्वारा सरपंच और जनप्रतिनिधियो द्वारा और प्रशासन द्वारा भेदभाव किया जा रहा है कई बार काम के लिए अधिकारियों के पास गए है फिर भी आज तक कोई सुनबाई नही हो रही है इसके चलते हम उपचुनाव में मतदान का वहिष्कार कर रहे है। जब तक हमे शासन की योजनाओ का लाभ नही मिलेगा तब तक हम मतदान नही करेंगे।

अगर विकास और शासन की योजनाओ को क्रीयानवित करने की बात है। तो यह जिम्मेदारी गांव के सरपंच और सचिव और पंचायत स्तर के अधिकारीयो की रहती है। लेकिन गांव के सरपंच ने ग्रामीणो के विकास के नाम पर सिर्फ कोरी वाह वाही लूट कर खुद की पीठ थप थपा ली इसका परिणाम उप चुनाव में साफ देखने को मिल रहा है और ग्रामीणो ने आरोप लगाया है की उनहे शासन की अधिकतम योजनाओ का लाभ आज तक नही मिला है जिससे मामला उपचुनाव वहिष्कार तक जा पहुंचा। गांव के सरपंच सहित अन्य क्षेत्रिय जनप्रतिनिधियो के लिए चुनाव वहिष्कार का फैसला किसी तमाचे से कम नही है। अगर गांव में विकास की और ध्यान आकृष्ति होता और सरपंच ने अपने पद का सदउपयोग जनता के भले के लिए किया होता तो चुनाव वहिष्कार की नौवत नही आती। 
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