शिवपुरी के हर गांव में आबकारी विभाग ने खुलवा दी अवैध कलारी

सतेन्द्र उपाध्याय/शिवपुरी। शराब बंदी के लिए चल रही मुहिम थमने का नाम ही नहीं ले रही है कि जिले में आबकारी विभाग ने शराब को घर पहुंच सेबा में परिवर्तित कर दिया है। आबकारी विभाग की मन मर्जी से जिले भर के लगभग हर गांव में शराब की दुकानें आबकारी विभाग ने खुलबा दी है। इस पर पुलिस कुछ हद तक कार्यवाही करती है। पर सबाल उठ रहा है कि जो विभाग इसके लिए ही बनाया गया है वह आखिर क्या कर रहा है। शिवपुरी जिले में शराब ने घर पहुंच सेवा का रूप ले लिया है जिसके चलते स्थिति यह है कि लोगों को रात दस बजे के बाद अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिये बाजार में दूध तो नहीं मिलता लेकिन हाँ, शराब जरूर पूरी रात उसे उपलब्ध हो जाती है। शराब के कारोबारियों पर पकड़ न होने की वजह से अब तो स्थिति यह हो गई है कि शराब के आहते बिना अनुमति के गांव-गांव में चलते नजर आ रहे हैं। 

यह स्थिति पूरे जिले की है। जहां लगातार खबर प्रकाशित होने के बाद महज पुलिस इन शराब माफियाओं को दबौच लेती है। लेकिन सबाल यह उठता है कि जिस विभाग को सरकार शराब के लिए ही चला रही है उस ने आज तक कितनी कार्यवाही की है। जिले की स्थिति यह है कि यहां जिले का आबकारी अमला शराब ठेकेदारों के सामने बौना साबित हो रहा है। नियमों से परे हटकर शराब ठेकेदारों द्वारा जिले में गांंव-गांव अवैध शराब का जाल फैला रखा है। जिस पर अंकुश लगा पाने में आबकारी अमले की भूमिका पर स वाल उठता है। 

शराब के कारोबार को लाभ का धंधा बनाने वाले ठेकेदार एक ओर जहां देशी शराब की दुकानों से अंग्रेजी शराब का कारोबार संचालित कर रहे हैं, वहीं पैकारियों के जरिये हर माह लाखों की आय कमा रहे हैं। जिससे शासन के राजस्व में चपत लग रहा है। इस ओर आबकारी अमला मूकदर्शक बना हुआ है। 

विदित हो कि जिले भर में वैध से ज्यादा अवैध शराब का कारोबार गांव-गांव में चरम पर है। यह शराब गांव में आसानी से परचूने की दुकान गुमटियों पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है। हालात यह है कि शहर हो या गांव हर जगह शाम ढलने के साथ ही जाम छलकाने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो पूरी रात जारी रहता है। 

शराब ठेकेदारों द्वारा एक लायसेंस के जरिये वैध की जगह अवैध शराब गांव-गांव भेजी जा रही है। जिसके तहत लाखों की कमाई की जा रही है इस ओर विभाग अनभिज्ञ बना हुआ है। 

बताया गया है कि इस अवैध कमाई का कुछ हिस्सा विभाग से जुड़े लोगों को भी पेश कर दिया जाता है। जिससे इस कारोबार में ठेकेदारों को छूट मिली हुई है। यह प्रशासन को चूना लगाकर इस गोरखधंधे में लगे हुए है। इस पूरे घटनाक्रम पर गौर करें तो शराब के लिए बने विभाग आबकारी में अगर अबैध शराब की शिकायत किसी को करनी होती है तो जिला आबकारी अधिकारी रविन्द्र मानकपुरी फोन उठाना तक मुनासिव समझते। 
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