Saturday, June 03, 2017

कोपरा से गढ़ा जा रहा है शिवपुरी का भविष्य, सिंध परियोजना में राजे की भी कोई सुनवाई नहीं

शिवपुरी। शहर के रह वासियों के लिए मृग मारीचिका बनी सिंध जलावर्धन योजना वैसे तो अपने आप में ही सुर्खिया बटोरने में माहिर है। और इन सुर्खियों का मुख्य कारण है काम में हो रही देरी। सभी इस काम को जल्द से जल्द खत्म करना चाह रहे है। जिससे शिवपुरी के सूख चुके कंठों को कुछ हद तक राहत मिले परंतु इस योजना का क्रियानवयन कर रहे ठेकेदार चूना लगाने में कोई भी कमी नहीं छोड़ रहे। 

सिंध परियोजना के कार्य को लेकर शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि कितने गंभीर हैं इस बात का खुलासा हाल ही में शिवपुरी विधायक एवं प्रदेश सरकार की केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे के शिवपुरी भ्रमण के दौरान सामने आया। मड़ीखेड़ा डेम पर इंटेक बैल के निरीक्षण के दौरान एक जागरूक नागरिक ने प्रशासनिक अमले के समक्ष उनका ध्यान इस ओर आकृष्ट कराने का प्रयास किया गया कि किस तरह कार्यरत एजेंसी दोशियान न सिर्फ लेट-लतीफी एवं झूठे वादे कर रही हैं, वहीं गुणवत्ताहीन कार्य भी कर रही है। 

यह बात प्रमुखता से सामने लाए जाने के बाद भी इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस बात को लेकर जागरूक नागरिक और संबंधित एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई, बावजूद इसके किसी ने इस गंभीर विषय पर ध्यान नहीं दिया। सबका ध्यान फिलहाल सिर्फ इस बात पर है कि किसी भी तरह प्रोजेक्ट एक बार पूरा हो जाए। 

सवाल यह उठता है कि यदि गुणवत्ताहीन कार्यों के सहारे एक बार प्रोजेक्ट पूरा भी हो गया तो यह प्रोजेक्ट कितने दिन टिकेगा। शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों के सामने इस बात का जिक्र किया गया कि दोशियान कंपनी द्वारा इन दिनों खूबत घाटी क्षेत्र में पाइप लाइन डालने के लिए बनाए जा रहे पिलर कोपरा में बनाए जा रहे हैं जो कितने दिन टिकेंगे यह किसी से छिपा नहीं है, क्योंकि उक्त पिलर उस स्थान पर बनाए जा रहे हैं, जिस स्थान पर बारिश से लेकर 6-8 महीने तक पानी भरा रहता है और कोपरा से बने पिलर पानी में रहने पर कैसे टिकेंगे यह सब जानते हैं। 

संबंधित एजेंसी के प्रतिनिधियों ने यह कहकर सबको भ्रमित करने का प्रयास किया कि कोपरा सिर्फ पाइपों को ढकने के काम में लिया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जिस कोपरा का सीएसआर में कोई जिक्र ही नहीं है उसका भुगतान किन मापदंडों से किया जाएगा, लेकिन इतने महत्वपूर्ण बिंदु को संज्ञान में लाए जाने के बाद भी किसी का ध्यान न देना कई सवालों को जन्म देता है। 

क्या है कोपरा
शिवपुरी जिले के आमोलपठा सहित कई क्षेत्रों में खेतों से निकलने वाली यह मिट्टी धोने पर रेत की तरह दिखाई देती है। शिवपुरी जिले में इन दिनों रेत की आढ़ में इस मिट्टी का भरपूर उपयोग हो रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार इस मिट्टी को रेत की जगह उपयोग में लाया तो जा रहा है, लेकिन इसकी म्याद काफी कम है। 

खासतौर पर इस कोपरा का उपयोग शासकीय कार्यों में किया जा रहा है। यदि इन दोनों की दरों पर विचार किया जाए तो रेत की कीमत की तुलना में यह कोपरा मात्र 40 प्रतिशत राशि में ही आसानी से प्राप्त हो जाता है, इस तरह ठेकेदार शासन को भारी-भरकम चूना लगा अपनी जेबें भर रहे हैं।
 
आखिर कैसे होगा भुगतान
दोशियान कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर महेश मिश्रा एवं कंपनी के मालिक रक्षित दोशी ने मंत्री एवं प्रशासनिक अधिकारियों के सामने स्वयं इस बात को स्वीकार किया कि रेत की अनुउपलब्धता के कारण पाइपों को ढकने के लिए कोपरा का उपयोग किया जा रहा है। 

सवाल यह उठता है कि जिस कोपरा का सीएसआर में कोई जिक्र ही नहीं है उसका भुगतान किस दर से किया जाएगा। सीएसआर के अनुसार को पाइपों को ढकने के लिए रेता का ही उपयोग किया जाना है। इसी रेता की आढ़ में कोपरा खपाया जा रहा है और शासन को खासा चूना लगाया जा रहा है। 

शिकायतकर्ताओं से निपटने तैयार थी मवालियों की टोली
कंपनी के कर्ताधर्ता यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके द्वारा यह काम किस तरह झूठ-फरेव के सहारे किया जा रहा है। उन्हें अंदेशा था कि इस तरह की कोई बात सामने आ सकती है, इसलिए मंत्री के भ्रमण के दौरान दो गाडिय़ों में कुछ मवालियों की टोली भी चल रही थी जो न सिर्फ इस दौरान शिकायतकर्ताओं को आंखे दिखा रहे थे, बल्कि लडऩे तक पर आमदा थे। 

ऐसी ही कुछ स्थिति खूबत मंदिर के सामने भी निर्मित हुई, लेकिन इन मवालियों की टोली पर पत्रकारों एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की युवा टोली भारी पड़ गई और उन्होंने चुप रहकर वहां से निकल जाना ही मुनासिब समझा।