जारी रहेगा प्रभारी कलेक्टर का बहिष्कार: संयुक्त पत्रकार मोर्चा

शिवपुरी। संयुक्त पत्रकार मोर्चा द्वारा 25 जनवरी से प्रभारी कलेक्टर के रवैए के खिलाफ शुरू किया गया आंदोलन और उसके अगले चरण में पांच दिवसीय धरना के उपरांत 4 फरवरी को सर्वसम्मति से लिया गया फैसला अब भी जस की तस है। 

सोमवार देर शाम संयुक्त पत्रकार मोर्चा के सदस्यों ने एक बैठक कर यह निर्णय लिया कि वे अपने 4 फरवरी के निर्णय पर कायम हैं और जब तक कलेक्टर का प्रभार नेहा सिंह मारव्या पर रहेगा तब तक उनके किसी भी कार्यक्रम का कवरेज नहीं किया जाएगा, साथ ही 4 फरवरी को सभी पत्रकारों के समक्ष उनके विरूद्ध जारी निंदा प्रस्ताव जस की तस कायम है। इस निर्णय में मप्र पत्रकार संघ, जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मप्र (जंप), मप्र मीडिया संघ, मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ, एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन संघ से जुड़े अधिकांश सदस्य शामिल हैं। 

गौरतलब है कि कलेक्टर के नेहा सिंह मारव्या के द्वारा पत्रकारों पर लगातार की गईं प्रतिबंधात्मक कार्यवाही के चलते पत्रकारों ने एकजुट होकर उनके खिलाफ संयुक्त पत्रकार मोर्चा का गठन किया था जिसमें पत्रकारों के सभी संगठन शामिल थे। 25 जनवरी से शुरू हुए आंदोलन में 29 जनवरी को यह फैसला भी सर्वस मति लिया गया कि 31 जनवरी से कलेक्ट्रेट परिसर परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। इसी क्रम में 31 जनवरी से धरना प्रारंभ किया गया। 

सभी पत्रकारों की सर्वसम्मति से एकराय थी कि प्रभारी कलेक्टर जिला कलेक्ट्रेट एवं जिला  पंचायत छोडक़र अन्यत्र आकर पत्रकारों से चर्चा कर खेद प्रकट करें, लेकिन आंदोलन एवं धरना के बाद भी वे अपनी हठधर्मिता पर कायम रहीं, आयुक्त ग्वालियर द्वारा मध्यस्थता के लिए एक प्रतिनिधि मंडल शिवपुरी भेजा गया जिससे हुई चर्चा के बाद धरना तो स्थगित कर दिया गया, लेकिन यह भी निर्णय लिया गया कि अब नेहा सिंह मारव्या के शिवपुरी रहने तक उनसे इस विषय में कोई संवाद नहीं किया जाएगा और न ही उनके किसी भी कार्यक्रम का कवरेज किया जाएगा, इतना ही नहीं सर्वस मति से उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित हुआ। 

यह सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए जिसमें ग्वालियर के प्रतिनिधि मंडल के अलावा शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव, अशोक कोचेटा, अनुपम शुक्ला, वीरेन्द्र भुल्ले, बृजेश सिंह तोमर सहित सभी पत्रकार संगठनों के प्रमुख एवं सदस्य शामिल थे। अचानक श्रेय लेने की होड़ के चलते 6 फरवरी को घटे नाटकीय घटनाक्रम एवं अपने स्वाभिमान को छोडक़र जिला पंचायत जाकर प्रभारी कलेक्टर से भेंट करने के उपरांत एक बार पुन: संयुक्त पत्रकार मोर्चा एकजुट नजर आया और उन्होंने एक बार फिर सर्वस मति से 4 फरवरी को अपने द्वारा लिए गए फैसलों को स्वीकारोक्ति देते हुए कहा कि वे अब भी अपने उस फैसले पर कायम हैं। 

जनसंपर्क आईं प्रभारी, लेकिन नहीं पहुंचे अधिकांश पत्रकार
पत्रकारों के  एक दल द्वारा स्वयं जिपं कार्यालय जाकर भारी मानमनोब्बल के बाद नेहा सिंह को जनसंपर्क कार्यालय लाने के लिए तैयार तो कर लिया, लेकिन उनकी इस शर्त को भी स्वीकारा कि वहां उनसे इस विषय पर कोई चर्चा नहीं होगी और न ही वे कोई खेद प्रकट करेंगी। उनका मानना था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जिसकी वजह से वे खेद प्रकट करें। प्रभारी कलेक्टर पांच मिनिट के लिए जनसंपर्क आईं, लेकिन जिपं जाकर उनको मनाकर लाने से अधिकांश पत्रकार क्षुब्ध दिखे और वे जनसंपर्क कार्यालय नहीं पहुंचे। इस समूचे घटनाक्रम को देखकर प्रभारी कलेक्टर स्वयं को ठगा सा महसूस कर वहां से निकल लीं। 
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