Monday, February 27, 2017

पूजा-अर्चना घोटाला: पुजारी ने की कलेक्टर से जांच की मांग

शिवपुरी। अभी तक आपने तरह-तरह के घोटालो के नाम सूने होगें अब भारत के मप्र के शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील के रन्नौद गांव में एक और नए घोटाले का नामकरण संस्कार हो गया है। बताया जा रहा है कि रन्नौद के गणपति के मंदिर के पुजारी को मिलने वाली रकम की हैराफैरी की गई है। पुजारी ने इस मामले की शिकायत की राजस्व के अधिकारियों से की है और कलेक्टर शिवपुरी से जांच की मांग की है। 

जानकारी के अनुसार बदरवास तहसील के रन्नौद में आने वाले गणपति जी का मंदिर औकाफ की संपत्ति है और ऐसे मंदिरों की पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियो को शासन हर माह वेतन देता है। इस मंदिर के पुजारी आंनद मिश्रा ने कलेक्टर को एक आवेदन सौपा है, इस आवेदन में कहा गया है कि मुझे मिलने वाली शासकीय रााशि मुझे न मिलकर राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी और किसी व्यक्ति को दे रहे है और ऐसा पिछले 8 साल से हो रहा है। 

बताया गया है कि पिछले आठ साल तक औकाफ खाते से पुजारी के नाम से लगभग पचास हजार से ज्यादा की राशि का भुगतान किया गया है। अब इस गणपति मंदिर के असली पुजारी आनंद प्रकाश मिश्रा ने कलेक्टर को आवेदन देकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। 

इस मंदिर के असली पुजारी आनंद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि वह गणपति मंदिर पर कई सालों से पूजा अर्चना का काम करते आ रहे हैं। तहसील औकाफ से पुजारी के रूप में वह नामांकित हैं लेकिन वर्ष 2008 से 2016 के बीच किसी कोमल प्रसाद शर्मा नाम के व्यक्ति के खाते में पुजारी को मिलने वाली राशि का भुगतान औकाफ कोलारस शाखा से किया गया। 

जबकि इस नाम का कोई पुजारी इस मंदिर पर कार्यरत ही नहीं है। मंदिर के असली पुजारी आनंद प्रकाश मिश्रा का कहना है कि औकाफ शाखा द्वारा गलत तरीके से कोमल प्रसाद शर्मा को हजारों रुपए का भुगतान किया गया। इस फर्जीवाड़े की असली पुजारी श्री मिश्रा ने जब तहसीलदार से जानकारी निकलवाई तो भुगतान होना पाया गया है। 

जब आनंद प्रसाद मिश्रा ने इसकी शिकायत राजस्व विभाग के अधिकारियों को की तो आनन-फानन में अप्रैल 2016 से सितंबर 2016 तक का उनको छह माह का भुगतान छह हजार रुपए कर दिया गया। 

आनंद प्रकाश मिश्रा का कहना है कि पूर्व में जो कोमल शर्मा के नाम से राशि का भुगतान किया गया उसकी जांच कराई जाए एवं शासन का पैसा हड़पने वाले और बिना कागजात के भुगतान करने वाले औकाफ के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।