एस्सरे @ललित मुदगल/शिवपुरी। अभी दो दिन पूर्व ग्वालियर से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र में एक खबर प्रकाशित हुई थी कि एक सहायक शिक्षिका अपने स्कूल में लगातार पिछले 2 वर्ष से अनुपस्थित है और वह वेतन भी आहरण कर रही है। डीपीसी महोदय ने जांच उपरांत उस शिक्षिका को निलबिंत कर दिया। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि जहां डीपीसी महोदय जांच करने गए थे वहां शिक्षिका की वर्तमान पदस्थपना ही नहीं है। वो तो दूसरे स्कूल में पढ़ा रही है और नियमित है।
पहले वो खबर जो मीडिया में प्रकाशित करवाई गई
ग्राम सिंकदपुरा में एक मात्र शिक्षिका नीरजा शर्मा पदस्थ है जो पिछले दो साल से स्कूल नही गई और विद्यालय को वहां पदस्थ 3 अतिथि शिक्षको के भरोसे छोड दिया। जांच के लिए बीते रोज डीपीसी शिरोमणि दुबे सिंकदपुरा पहुंचे तो वहां अतिथि शिक्षक मिला। जांच उपरांत ज्ञात हुआ कि यहां पदस्थ सहायक अध्यापक नीरजा शर्मा पिछले 2 साल से स्कूल नही आई ही नही है। ग्रामीणो ने बताया कि शिक्षिका जब से यहां पदस्थ हुई है। तब से 10 से 15 दिन में एकाध बार आ जाती हैं परन्तु पिछले करीब डेढ दो साल से तो उन्होने स्कूल की शक्ल ही नही देखी है।
इस पर सहायक शिक्षिका नीरजा शर्मा को जांच उपरांत निलबिंत कर दिया है। डीपीसी शिरोमणि दुबे का कहना है कि खास बात यह है कि स्कूल आए बिना नीरजा शर्मा ने हर माह का वेतन टाईम टू टाईम प्राप्त किया। जिसमें लिपिक सचिन अग्रवाल, प्रदीप शर्मा सहित संकुल प्राचार्य राजेश श्रीवास्तव की मिली भगत रही है। इनकी भूमिका की जांच की जा रही है। उक्त लोगो से उस संपूर्ण रकम की वसूली का आदेश भी जारी किया जाऐगा जो शिक्षिका को उक्त लोगों की मिली भगत से किया जा रहा था।
लेकिन शिक्षिका तो किसी दूसरे स्कूल में पढ़ा रही थी
जैसा कि मीडिया को डीपीसी शिरोमणि दुबे ने बताया कि शिक्षिका ग्राम सिंकदपुरा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ थी। इस मामले में पता चला है कि सहायक शिक्षिका नीरजा शर्मा को आदेश क्रमांक 213 दिनांक 30-4-2014 के आधार पर पत्र क्रमांक 49/भा.मु. /2014 कार्यालय शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिकंदपुरा विकासखंड पोहरी से भार मुक्त कर आगामी आदेश तक के लिए शासकीय उत्कृष्ट उमावि पोहरी में विज्ञान शिक्षक के पद पर नियुक्त किया जाता है।
इसके अतिरिक्त शासकीय उत्कृष्ट उमा विद्यालय पोहरी के प्राचार्य आरके श्रीवास्तव ने पत्र क्रमांक 510 से प्रमाणीकरण दिया कि श्रीमती नीरजा शर्मा सहायक अध्यापक शासकीय विद्यालय सिकंदपुरा को उत्कृष्ट विद्यालय की प्रबंधन समिति के प्रबंधक के आदेश क्रमाक 213 से दिनांक दिनांक 30-4-2014 से विज्ञान सहायक के पद पर अपने पदीय कर्तव्यो को नियमित रूप से निर्वाहन कर रही है।
डीपीसी की जांच पर सवाल
अब सवाल यह उठता है कि जब सहायक अध्यापक नीरजा शर्मा किसी अन्य स्कूल में प्रतिनियुक्ति पर थीं तो डीपीसी वहां क्या जांच कर आए। मीडिया को दी गई सूचना में डीपीसी ने यहां तक बताया कि उनके वेतन भत्तों के आहरण में कितने लोगों का हाथ है, परंतु वो यह पता नहीं कर पाए कि नीरजा शर्मा इस स्कूल में पदस्थ भी हैं या नहीं। ये कैसी जांच थी जिसकी शुरूआत ही अविवेकपूर्ण थी।
यह तो जांच घोटाला है भई
इस पूरे प्रकरण में डीपीसी साहब की जांच में कई सवाल खडे हो रहे है। या यूं कह लें कि साहब ने अपनी जांच में ही घोटाला कर दिया। पहला सवाल कि डीपीसी साहब ने शिक्षिका को बिना कोई नोटिस दिए सीधे निलबंन की कार्यवाही कैसे कर दी। क्या डीपीसी को किसी अध्यापक का निलबिंत करने का अधिकार है। जब महिला अध्यापक शासन के आदेश से अपने शैक्षाणिक कार्य कर रही है, तो उसकी मिथ्या जांच कर उसे निलबिंत करने के सामचार क्यों प्रकाशित कराए जा रहे है।
महिला अध्यापक के प्राचार्य का बयान
इस मामले में पोहरी उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य आर के श्रीवास्तव ने शिवपुरी समाचार डॉट कॉम को बताया कि श्रीमती नीरजा शर्मा उत्कृष्ट विद्यालय की प्रबंधन समिति के प्रबंधक के आदेश क्रमाक 213 से दिनांक दिनांक 30-4-2014 से विज्ञान सहायक के पद पर अपने पदीय कर्तव्यो को निर्वाहन कर रही है और वो नियमित हैं।
बार बार सिंघम क्यों बन जाते हैं डीपीसी
डीपीसी शिरोमणि दुबे के दौरे और छापामारी जांच अक्सर विवादों में रहती है। पिछले दिनों एक शिक्षक व उसकी पत्नी को उसके घर में जाकर अपमानित करने का मामला काफी तूल पकड़ चुका था। मामले की जांच अभी भी चल रही है। डीपीसी की संघ शक्ति से फाइलें आगे बढ़ने से रुक गईं हैं परंतु सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। अब ये नया टंटा कर दिया।