शिवपुरी। जिले में एक ओर प्रशासन सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पिछोर जनपद की ग्राम पंचायत भौती में पंचायत की जमीन पर अवैध मार्केट का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है, क्योंकि शिकायत किसी आम ग्रामीण ने नहीं, बल्कि स्वयं ग्राम पंचायत की सरपंच ज्योति बिलैया ने की है। उनका आरोप है कि भाजपा नेता विशम्भर दयाल छिरौल्या और उनके परिजन पंचायत की सरकारी भूमि पर दुकानें बनाकर कब्जा कर रहे हैं, जबकि प्रशासन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे बैठा है।
सरपंच ने तहसीलदार, एसडीएम और पंचायत विभाग को शिकायत देने के बाद अब कलेक्टर से भी हस्तक्षेप की मांग की है। शिकायत के साथ निर्माण स्थल के फोटो भी सौंपे गए हैं। उनका कहना है कि पिछले आठ दिनों से लगातार संबंधित अधिकारियों को मामले से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य दिन-रात जारी है। उन्हें आशंका है कि जब तक प्रशासन हरकत में आएगा, तब तक पूरी मार्केट तैयार हो जाएगी।
पंचायत का दावा-यहीं बननी थी पंचायत की मार्केट
सरपंच ज्योति बिलैया का कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा है, वह ग्राम पंचायत की संपत्ति है। पंचायत ने इसी स्थान पर ग्रामीणों की सुविधा के लिए अपनी मार्केट विकसित करने का निर्णय लिया था, लेकिन उससे पहले ही जमीन पर कब्जा कर दुकानें बनाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार शिकायत देने के बावजूद किसी स्तर पर निर्माण रुकवाने की कोशिश नहीं की गई।
पहले हटाए गए थे सरकारी भवन
सरपंच के अनुसार जिस स्थान पर फिलहाल निर्माण चल रहा है, वहां पहले पशुपालन विभाग का अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग का भवन मौजूद था। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान इन जर्जर भवनों को हटाया गया था। अब उसी जमीन पर निजी निर्माण शुरू हो जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भाजपा नेता का पक्ष-जमीन हमारी पुश्तैनी
वहीं भाजपा नेता विशम्भर दयाल छिरौल्या के पुत्र एवं पूर्व सरपंच रामेन्द्र छिरौल्या ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है, वह उनके परिवार की कई दशक पुरानी निजी जमीन है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का कब्जा नहीं किया गया है और इसके संबंध में आवश्यक दस्तावेज भी अधिकारियों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश
पिछोर एसडीएम ममता शाक्य ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि पंचायत ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस सर्वे नंबर की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने का दावा किया जा रहा है। इसलिए तहसीलदार और पटवारी को मौके पर जाकर सीमांकन करने तथा वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें प्रशासन पर
मामले ने प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी मुहिम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि भूमि पंचायत की है तो निर्माण रोकने में देरी क्यों हो रही है, और यदि भूमि निजी है तो विवाद का शीघ्र समाधान क्यों नहीं किया जा रहा? अब सबकी निगाहें कलेक्टर की कार्रवाई और सीमांकन रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि जमीन वास्तव में पंचायत की है या निजी।
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