शिवपुरी। सरकारी दफ्तरों में लेट-लतीफी और साहब गायब हैं वाले दिन अब लदने वाले हैं। शिक्षा विभाग में अब सिर्फ गुरुजी ही नहीं, बल्कि दफ्तरों में बैठने वाले बड़े-बड़े अधिकारी और क्लर्क (बाबू) भी डिजिटल रडार पर आ गए हैं। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के बाद अब लोक शिक्षण विभाग ने इस नियम का दायरा बढ़ाते हुए विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है। आगामी 1 जुलाई से विभाग में ऑफलाइन उपस्थिति या रजिस्टर में पेन से हस्ताक्षर करने वाली पुरानी व्यवस्था को हमेशा के लिए 'बाय-बाय' कह दिया गया है।
न चेहरा स्कैन, न बहानेबाजी, हमारे शिक्षक एप संभालेगा कमान
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नए फरमान के मुताबिक, अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय, संकुल केंद्रों और शासकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के हर एक लोकसेवक को 'हमारे शिक्षक एप पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
इस आदेश के बाद अब दफ्तरों के बाबू यह बहाना नहीं बना पाएंगे कि "लोकेशन ट्रेस नहीं हो रही" या "चेहरा स्कैन नहीं हो रहा"। विभाग ने साफ कर दिया है कि 1 जुलाई से सभी कर्मचारियों की उपस्थिति और उनके अवकाश (Leave) का पूरा लेखा-जोखा इसी डिजिटल एप के जरिए ट्रैक किया जाएगा।
नो अटेंडेंस, नो सैलरी,सीधे अनुपस्थित मानने के निर्देश
आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह और राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह द्वारा जारी सख्त निर्देशों में कहा गया है कि जिले के सभी कार्यालय प्रमुखों को इस व्यवस्था का व्यक्तिगत रूप से पालन सुनिश्चित कराना होगा। आदेश में दो टूक चेतावनी दी गई है। यदि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी इस डिजिटल प्रणाली पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उसे सीधे तौर पर अनुपस्थित (Absent) माना जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई होगी।
जमीनी हकीकत: नेटवर्क और तकनीकी खामियों का डर
एक तरफ जहां विभाग इस व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों और शिक्षकों में इसे लेकर चिंता की लकीरें हैं। शिक्षक संगठनों का दावा है कि,
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आज भी नेटवर्क की भारी समस्या है। पूर्व में केवल शिक्षकों के लिए लागू इस एप में कई बार तकनीकी खामियां देखी गई हैं, जहां एप न तो सही लोकेशन ट्रेस कर पाता है और न ही समय पर खुलता है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को इस कड़े नियम को शत-प्रतिशत थोपने से पहले एप की तकनीकी कमियों को दूर करना चाहिए।
इस मामले जिला शिक्षा अधिकारी आकाश यादव का कहना हैं कि पूरी प्रणाली ऑनलाइन होने से अब मैन्युअल रिकॉर्ड रखने और फाइलों के चक्कर काटने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। अवकाश की स्वीकृतियां भी पारदर्शी होंगी। जो निर्देश भोपाल से आए हैं, उन्हें हमने संबंधित कार्यालयों को जारी कर दिया है। अगर किसी को एप चलाने में तकनीकी समस्या है, तो कार्यालय में उसका समाधान कराया जाएगा, लेकिन हाजिरी इसी से लगेगी।

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