Shivpuri News: निजी हॉस्टल मे स्टूडेंट को रखा भूखा, फीस मांगने पर नही की वापस,पुलिस में शिकायत

Lalit Mudgal
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शिवपुरी।
शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में संचालित एक निजी हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर शुक्रवार को कई पालक शिकायत लेकर थाने पहुंच गए। पालकों ने हॉस्टल प्रबंधन पर बच्चों को समय पर भोजन नहीं देने, मूलभूत सुविधाओं में लापरवाही बरतने और बच्चों को कुछ ही दिनों में हॉस्टल से निकालने के बाद जमा फीस की पूरी राशि वापस नहीं करने के आरोप लगाए हैं।

पालकों का कहना है कि उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और रहने की बेहतर व्यवस्था की उम्मीद में हॉस्टल में दाखिला कराया था, लेकिन कुछ ही दिनों में बच्चों ने वहां की व्यवस्थाओं को लेकर परेशानी बतानी शुरू कर दी। इसके बाद जब बच्चों को वापस घर बुलाया गया तो फीस वापसी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। मामले की शिकायत कोतवाली पुलिस के साथ जिला शिक्षा अधिकारी से भी करने की बात पालकों ने कही है।

दोपहर तक भोजन नहीं मिलने का आरोप
बम्हारी गांव निवासी ब्रज मोहन ने बताया कि उन्होंने अपने तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले बेटे का दाखिला निजी हॉस्टल में कराया था। इसके लिए उन्होंने करीब 50 हजार रुपए जमा किए थे। ब्रज मोहन का आरोप है कि हॉस्टल में बच्चे को समय पर भोजन नहीं दिया जाता था। कई बार दोपहर 12 बजे तक भी उसे खाना नहीं मिलता था। बेटे से मिली जानकारी के बाद उन्हें हॉस्टल की व्यवस्था को लेकर चिंता हुई और उन्होंने बच्चे को वहां से वापस बुला लिया।

इसके बाद जब उन्होंने जमा की गई फीस वापस मांगी तो हॉस्टल संचालक ने पूरी राशि लौटाने से इनकार कर दिया। पालक का कहना है कि इतनी बड़ी रकम जमा करने के बावजूद बच्चे को मूलभूत सुविधा तक ठीक से नहीं मिल पा रही थी।

आठ दिन में ही बच्चे को हटाया, फीस में कटौती का आरोप
इसी गांव के छोटेलाल लोधी ने बताया कि उनका बेटा 10वीं कक्षा में पढ़ता है। उन्होंने भी बच्चे का दाखिला हॉस्टल में कराया था और करीब 9 हजार रुपए जमा किए थे। छोटेलाल का आरोप है कि बच्चे को हॉस्टल में कई तरह की परेशानियां होने लगीं और उसे समय पर भोजन नहीं मिल रहा था। करीब आठ दिन बाद उन्होंने बेटे को हॉस्टल से निकाल लिया। पालक के मुताबिक जब उन्होंने जमा राशि वापस मांगी तो संचालक ने पूरी रकम वापस नहीं की और करीब 4 हजार रुपए ही लौटाए, जबकि बाकी राशि काट ली गई।

13 हजार जमा किए, 5500 रुपए काटने का आरोप
पालक कल्याण सिंह ने भी हॉस्टल प्रबंधन पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनका बच्चा भी हॉस्टल में केवल आठ दिन रहा था। कल्याण सिंह के मुताबिक उन्होंने बच्चे की फीस के रूप में करीब 13 हजार रुपए जमा किए थे। बच्चे को वापस बुलाने के बाद फीस लौटाने की मांग की गई तो हॉस्टल प्रबंधन ने करीब 5,500 रुपए काट लिए और शेष राशि वापस की।पालकों का सवाल है कि यदि बच्चे कुछ ही दिनों तक हॉस्टल में रहे तो इतनी बड़ी राशि किस आधार पर काटी गई। उन्होंने फीस कटौती का स्पष्ट हिसाब देने की मांग भी की है।

फोन पर भी बच्चों की बातचीत पर निगरानी का आरोप
पालकों ने हॉस्टल प्रबंधन पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों को अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत करने की पूरी स्वतंत्रता नहीं थी। पालकों के अनुसार बच्चों की फोन पर बात हॉस्टल संचालक की मौजूदगी में कराई जाती थी। उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि बच्चे हॉस्टल की व्यवस्थाओं या वहां होने वाली किसी परेशानी की जानकारी अपने माता-पिता को न दे सकें। 

शिकायत करने पहुंचे तो धक्का देकर बाहर निकालने का आरोप
पालकों का आरोप है कि जब उन्होंने बच्चों की व्यवस्थाओं और फीस वापसी को लेकर हॉस्टल संचालक से बातचीत करने की कोशिश की तो विवाद की स्थिति बन गई। पालकों का दावा है कि उनके साथ ठीक से बात करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने मामले को पुलिस और शिक्षा विभाग तक ले जाने का निर्णय लिया।

पालकों ने पुलिस और शिक्षा विभाग से जांच की मांग की
शुक्रवार को कई पालक कोतवाली थाना पहुंचे और हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत की। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो हॉस्टल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी से भी हॉस्टल की मान्यता, बच्चों को दी जा रही सुविधाओं, भोजन व्यवस्था और फीस वसूली के नियमों की जांच कराने की मांग करने की बात कही है।

फीस विवाद के साथ बच्चों की सुविधाओं पर भी उठे सवाल
यह मामला फिलहाल पालकों और हॉस्टल संचालक के बीच फीस वापसी के विवाद से शुरू हुआ है, लेकिन शिकायतों के बाद हॉस्टल में बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को यदि भोजन समय पर नहीं मिल रहा था तो हॉस्टल प्रबंधन की ओर से इसकी निगरानी कैसे की जा रही थी। वहीं, फीस में कटौती किस नियम या समझौते के आधार पर की गई, यह भी जांच का विषय है।

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