एक परिवार की कैद में हैं भगवान भोलनाथ, कहा हमारे पूर्वजो की समाधि है

शिवपुरी। भगवान शिव की पुरी में कई एतिहासिक शिवलिंग है, गुरू गोरखनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग लगभग 1 हजार साल पुराना शिवलिंग है इसका प्रमाण स्वंय गुरू गोरखनाथ देते है। वही शहर के प्राईवेट बस स्टैंड के पास एक शिवलिंग भी लगभग इतना ही पुराना है। यह शिवलिंग शहर के सभी मंदिरो से ज्यादा विशाल है, लेकिन इसे एक परिवार की चार दिवारी में कैद कर रखा है, इस शिवलिंग पर अपना हक जताने वाले गोस्वामी परिवार का कहना है कि यह हमारे पूर्वजो की समाधि है। 

इतिहासकार अरुण अपेक्षित द्वारा लिखी गई किताब अतीत से आज तक में पेज नंबर 14 पर बताया गया है कि शिवपुरी नाथ संप्रदाय और शैव मतावलंबियों का गढ रहा है। जिले की रन्नौद, सुरवाया, तेरही, गुना कदवाया में शैव साधुओं द्वारा बनाए गए कई मंदिर आज भी मौजूद हैं। नाथगुरू गोरखनाथ का मंदिर शहर में होना इस प्रमाणिकता को सिद्व करता है। 

शहर के प्राइवेट बस स्टैंड से महावीर नगर के लिए जाने वाले रास्ते पर स्थित 10वीं सदी के प्राचीन शिव मंदिर पर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा कर लिया है। तंत्र साधना के लिए कापालिकों द्वारा बनवाए गए इस मंदिर में बना शिविलिंग जिले में मौजूद 10वीं सदी के अन्य शिवलिंगों से बेहतर स्थिति में है। बावजूद इसके अधिकारी इसे संरक्षित नहीं कर सके। 

अभिलेख को मानें तो यह शिव मंदिर भी 10वीं-11वीं सदी का शैव संप्रदाय के साधुओं द्वारा बनाया गया मंदिर है। इतिहासकार अरुण के मुताबिक जब शैव संप्रदाय के साधु की मृत्यु होती थी तो मठ के लोग उसकी समाधि पर एक छतरी बनाकर शिवलिंग का निर्माण करा देते थे। यह मंदिर भी उसी समय का है। लेकिन 2007 के बाद बीच शहर में बने इस प्राचीन शिव मंदिर पर एक परिवार ने कब्जा कर लिया है, जिससे यहां लोग नहीं पहुंंच सकते। 

हमारे पूर्वजों की है समाधि 
यह मंदिर हमारे पूर्वजों का है। जिस पर उनकी समाधि बनी हुई है। बाद में यहां शिव मंदिर बनवाया गया।
सुबोध गोस्वामी, मंदिर मालिक होने का दावा करने वाले 

मंदिर देखकर सोचेंगे, क्या करना है 
हमें भी कई लोगों ने इस एतिहासिक मंदिर के बारे में बताया है। लेकिन आज तक हम वहां पहुंच नहीं पाए। बहुत जल्द इस मंदिर को देखने के बाद इसके संबंध में फैसला लेंगे। 
रुपेश उपाध्याय, एसडीएम शिवपुरी
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