बडी खबर: डीईओ के अंदर डीपीसी का डर, 2 स्कूल बंद

ललित मुदगल एक्सरे/शिवपुरी। हमेशा मीडिया के सुर्खियो में छाये रहने के प्रयास करने और आरएसएस का चोला ओढकर किराए की एक्सपायरी कुर्सी पर डटे डीपीसी के असर के कारण जिला शिक्षा अधिकारी बेअसर हो गए। इनके बेअसर होने के कारण जिले के 2 स्कूल बंद हो गए है। 

डीपीसी ऑफिस से प्लांट खबर क्या है..
पोहरी विधान सभा के ग्राम सिंकदपुरा के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों का निरिक्षण डीपीसी शिरोमणि दुबे ने किया था। इस दौरे की खबर ग्वालियर से प्रकाशित समाचार पत्रो ने 4 कॉलम में प्रकाशित भी की थी। इस खबर के अनुसार डीपीसी महोदय ने ग्राम सिंकदपुरा के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय का निरिक्षण किया तो दोनो स्कूलो की प्रभारी सहायक आध्यपक नीरजा शर्मा अनुपस्थित मिली। 

खबर में बताया गया था कि उक्त स्कूल में एक आदिवसी युवक बच्चों का पढ़ाता मिला, जिसे डीपीसी शिरोमणि दुबे ने भाड़े का शिक्षक कहा। खबर में प्रकाशित किया था कि शिक्षका नीरजा शर्मा ने इस आदिवासी युवक को बच्चों को पढाने के लिए भाड़े पर रखा था। 

शिक्षिका नीरज शर्मा के अनुपस्थित मिलने पर डीपीसी शिरोमणि दुबे ने कार्यवाही के लिए प्रतिवेदन बनाकर पहले जिला पंचायत को न भेजते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस को भेज दिया। यहां इस प्रतिवेदन पर डीईओ ने नीरजा शर्मा को निलबिंत कर दिया। 

प्रतिवेदन पर डिस्काउंट क्यों
डीपीसी के इसी दौरे की खबर में इन दोनों विद्यालयो के साथ-साथ डीपीसी महोदय ने ग्राम पिपरघार के मावि डीपीसी को बंद मिला। इस स्कूल के प्रभारी अंशुल श्रीवास्तव, अवधेश शर्मा, सुमनलता सिसोदिया, मीना वर्मा पदस्थ है। वहीं मावि दौरानी भी निरिक्षण के दौरान डीपीसी को बंद मिली। 

सवाल अब यह उठता है कि एक ही दिन में डीपीसी महोदय ने तीनों स्कूलों का निरिक्षण किया, तो फिर इन तीनों स्कूलों के खिलाफ प्रतिवेदन भेजा होगा, लेकिन इसमें एक दिन की अनुपस्थित रहने वाली नीरजा शर्मा को ही क्यो निलंबित किया। क्यो कार्रवाई में डिस्काउंट दिया गया। या फिर इन तीन में से दो स्कूलों को का प्रतिवेदन भेजा ही नही गया तो ऐसा क्यों ? सवाल अभी भी खडा है कि फिर नीरजा शर्मा की ही प्रतिवेदन क्यो भेजा गया। 

डीपीसी का असर
इस मामले का प्रतिवेदन जिला पंचायत सीईओ को न भेजते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा गया। अध्यापक नीरजा शर्मा को निलबिंत करने से पूर्व किसी भी तरह का नोटिस नही भेजा गया। नियामानुसार नोटिस भेजा जाना चाहिए था और डीईओ को किसी भी अध्यापक को निलबिंत करने का अधिकार ही नही है, सूत्रो का कहना है कि डीपीसी ने डीईओ पर प्रेशर बना कर यह निलबंन करवाया है। 

यह फिर........मौक पर कुछ और खबर में कुछ
जैसा कि विदित है कि डीपीसी के दौरे की खबर ऐसे प्रकाशित होती है, जैसे वे स्कूलों का निरिक्षण करने नही सर्जिकल स्ट्राइक कर वापस लौटे हों। इस मामले में बताया जा रहा है कि जिस आदिवासी युवक को वह भाडे का शिक्षक निरूपित कर रहे है वह अतिथि शिक्षक है और उसकी नियुक्ति इस वर्ष के जुलाई में विधिवत हो गई थी, और रहा नीरजा शर्मा को अनुपस्थित बताने का तो वह विधिवत लिव पर थी। 

फिर अपने विभाग को बदनाम कराया डीपीसी ने
शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अधिकारियों के दौर अतिआवश्यक है, लेकिन हर दौरे की खबर मीडिया में आए यह आवश्यक नही है। डीपीसी के हर दौरे की खबर मीडिया में आती है और इन सभी खबरों में शिक्षा विभाग बदनाम होता है और शिक्षकों जलील किया जाता है। स्थान पर और कुछ होता है और खबरो में और कुछ। 

और अत: में.......... 2 स्कूल बंद 
आध्यपक नीरजा शर्मा के निलबिंत होने के कारण ग्राम सिंकदपुरा के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बंद से हो गए है। शिक्षा विभाग अभी तक इन स्कूलों में किसी भी आध्यपक को नही भेज सका है। डीपीसी की हठधर्मिता के कारण अब इन स्कूलो में पढने वाले बच्चो की भविष्य पर सकंट खडा गया है। 
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