शिवपुरी की खट्टी मीटी यादों के बीच अलविदा 2017

शिवपुरी। वर्ष 2017 कांग्रेस तथा भाजपा के लिए मिले जुले असर वाला रहा हैं। वर्ष 2017 में राजनेताओं, अधिकारियों व शिवपुरी के नागरिकों के लिए कहीं खुशी कहीं गम जैसा माहौल निर्मित कर विदा हो गया हैं। शहर के नागरिकों के लिए सरकार द्वारा चलाई गयीं विभिन्न योजनायें साल गुजर जाने के बाद भी आज तक अधर में ही लटकी हुई हैं। शिवपुरी की सबसे महत्वाकांक्षी योजनायें सिंध जलावर्धन योजना में अभी भी समय लगने की संभावनायें बनी हुई है। 

वहीं शहर के विकास के लिए प्रारंभ की गई सीवर लाईन योजना, सडक़ निर्माण, एनटीपीसी, मेडीकल कॉलेज, जैसी अन्य योजनायें द्रोपदी के चीर की तरह समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं। उक्त योजनाओं पर शासन द्वारा स्वीकृत धन राशि से कहीं अधिक व्यय हो जाने के बावजूद भी पूर्ण नहीं हो पा रही हैं। वहीं कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ही राजनैतिक दल श्रेय लेने की राजनीति में उलझे रहे तथा विकास कार्यों की ओर समुचित ध्यान नहीं दिया गया। राजनैतिक दलों को भी बीता वर्ष दर्द देने में पीछे नहीं रहा हैं। वहीं अधिकारी भी इस वर्ष अछूते नहीं रहे हैं। 

श्रेय की होड में लगे रहे राजनेता
जिले भर में शासन द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्यों को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के राजनेता श्रेय लेने की राजनीति से नहीं उभर पाये। श्रेय लेने की होड़ में जन सामान्य को उसका खामियाजा भुगताना पड़ रहा हैं। सिंध जलावर्धन योजना जो कि शिवपुरी के लिए अधिक महत्वपूर्ण थी। जिसे अधिकारियों और ठेकेदार द्वारा जनता को तारीख पर तारीख दी जाती रही। लेकिन आज तक सिंध का पानी नागरिकों को उपलब्ध नहीं हो पाया हैं। हालांकि सिंध का पानी ग्वालियर वायपास तक लाने में क्षेत्रीय विधायक यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया की अहम भूमिका रही हैं। लेकिन अभी नलों की टोटिंयों में पानी पहुंचने में समय लगना तय हैं। वहीं कांग्रेस द्वारा एक बार फिर श्रेय लेने की राजनीति अपनाई जा रही हैं। अभी पानी ग्वालियर वायपास तक ही आया हैं। जिसे लेकर कांग्रेस द्वारा धन्यवाद सभा का आयोजन का कार्यक्रम बनाया गया है। 

आश्वासनों पर गुजरा पूरा वर्ष 
जनता को सुविधा मुहैया कराने के लिए राजनेताओं द्वारा लगातार आश्वासन पर आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन जनता को उनसे कोई लाभ नहीं हो पाया है। चाहे वह हॉस्पीटल से स्वास्थ्य सुविधाओं, सडक़ों, पेयजल, शिक्षा, उद्योग, बेरोजगारी अथवा शासन द्वारा क्रियान्वित की गई योजनाऐं हो। शासन का करोड़ों रूपया व्यय हो जाने के बावजूद भी जनता को उसका लाभ नहीं मिल पाया। जिला चिकित्सालय में जहां निर्माण कार्य में तो करोड़ों रूपया पानी की तरह बहा दिया गया लेकिन यहां की स्वास्थ्य सेवा ध्वस्त पड़ी हुई हैं। जिसमें आईसीयू, ट्रोमा सेंटर, मेडीकल स्पेशलिस्टि चिकित्सक जैसी मूलभूत सुविधायें तक जनता को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। चिकित्सालय में शासन द्वारा आगे जो निर्माण कार्य में 30 करोड़ रूपया का बजट बनाया गया हैं, लेकिन शासन द्वारा इस ओर गंभीरता से विचार करते हुए यह सोचना चाहिए कि अच्छा भवन बनाने से रोगियों को उपचार मुहैया नहीं हो सकता है, उसके लिए तो अनुभवी चिकित्सकों की ही आवश्यकता होगी। जबकि उक्त मामले को लेकर प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह, कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया एवं स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई प्रदेश सरकार के मंत्रियों आश्वासन ही दिए गए लेकिन जनता की समस्या जस की तस बनी रही, लेकिन अब वर्ष 2018 में क्या चिकित्सकों की समस्या का समाधान शासन द्वारा किया जा सकेगा? यह तो आने वाला ही कल बताएगा।

वर्ष 2017 ने कांग्रेस को दिया गम 
वर्ष 2017 के आगमन के साथ ही कांग्रेस को गम देना शुरू कर दिया जिसमें सबसे पहले कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह को भ्रष्टाचार के मामले में जेल की हवा खाना पड़ी। वहीं दूसरे मामले में करैरा विधायक शकुंतला खटीक को असंवैधानिक भाषा का उपयोग करने के मामले में प्रकरण दर्ज कराया गया। वहीं कर्मचारी कांग्रेस के नेता राजेन्द्र पिपलौदा पर अश्लील एसएमएस भेजने के मामले में प्रकरण दर्ज हुआ  वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिलाध्यक्ष व कोलारस विधानसभा से विधायक रामसिंह दादा का असमय निधन हो गया। जो कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका था। श्री यादव एक स्वच्छ छवि, मिलनसार, व्यक्ति थे। उनके न रहने से कोलारस विधानसभा क्षेत्र ही नहीं अपितु पूरे जिले की राजनीति पर इसका प्रभाव पड़ा। 

रातों-रात हुए जिलाधीश का स्थानांतरण बना था चर्चा का विषय 
वर्ष 2017 में पूर्व जिलाधीश राजीव चन्द्र दुबे द्वारा शहर भर में चलाए गए वेतरतीब अतिक्रमण हटाओ अभियान से त्रस्त जन सामान्य द्वारा जहां एक ओर न्यायालय की शरण ली जा रही थी। वहीं इसके समाचार शासन तक पहुंच रहे थे। जिसे लेकर शासन द्वारा शहर की बिगड़ रही व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए ओमप्रकाश श्रीवास्तव को जिलाधीश के रूप में भेजा गया।

जिनके द्वारा अपने अल्प कार्यकाल में ही अपनी सरल कार्यशैली से शहर की बिगड़ती व्यवस्थाओं को संभाल लिया। अभी उन्हें शिवपुरी में आए महज 6 माह का ही समय बीता था। वहीं मंदसौर में किसान के आंदोलन के बिकराल रूप धारण कर लिए जाने से उनका रातौ-रात मंदसौर के लिए स्थानांतरण कर दिया। जो आज भी चर्चा का विषय बना हुआ हैं, लेकिन ओपी श्रीवास्तव के स्थानांतरण के बाद ही जिलाधीश तरूण राठी ने जिले की कमान संभाली और उनके प्रयासों से अधूरे कार्य प्रगति की ओर हैं वहीं सिंध जलावर्धन योजना को शिवपुरी शहर तक लाकर खड़ा  कर दिया हैं। 

आने वाला वर्ष 2018 किसको खुशी देगा तथा किसको देगा गम
कोलारस के विधायक रामसिंह यादव का असमय निधन हो जाने से जहां कांग्रेस का भारी क्षति का सामना करना पड़ा है। वहीं कोलारस विधानसभा क्षेत्र में  शासन द्वारा विकास कार्यों की झड़ी लगा दी गई है। कोलारस विधानसभा क्षेत्र में शासन द्वारा लगभग 50 करोड़ के विकास कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो कोलारस की जनता के लिए आने वाले भविष्य में लाभ दायक होंगे। उक्त विकास कार्यों के अलावा और भी घोषणायें शासन की जा सकती हैं जिसका लाभ निश्चित रूप से कोलारस विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को होगा। 

कोलारस विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उप चुनाव को लेकर दोनों ही राजनैतिक दल अपनी-अपनी नाक का सवाल बनाकर तैयारी में लगे हुए हैं। भाजपा की ओर से जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चार दौरे कर चुके हैं, वहीं प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह, जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, मंत्री उमाशंकर गुप्ता जैसे दिग्गज नेता कोलारस विधानसभा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। वहीं कांग्रेस की ओर कई विधायक एवं संगठन के प्रदेश एवं संभाग के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाला वर्ष 2018 किसको खुशी देगा तथा किसको देगा गम।
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