फर्जी केसीसी बनाकर 3 लाख रूपए निकालने बाले मेनेजर गिरफ्तार, दो फरार

शिवपुरी। इलाहाबाद बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ तथा इलाहाबाद बैंक शाखा शिवपुरी के पूर्व मैनेजर रमेशचंद्र केन को शिवपुरी पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह न्यायालय में अपने अभिभाषक से मिलने के लिए आया हुआ था। गिरफ्तार करने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। आरोपी रमेशचंद केन पर एक खातेदार की फर्जी केसीसी बनाकर तीन लाख रूपए आहरण करने का आरोप है तथा इस मामले में इलाहाबाद बैंक के मैनेजर रीतेश शिवहरे की रिपोर्ट पर कोतवाली शिवपुरी में आरोपी रमेशचंद्र केन, बीके माथुर और एक अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध भादवि की धारा 420, 467, 468 और 471 का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी बीके माथुर फरार बना हुआ है। पुलिस उस फर्जी नक्टू किरार की भी तलाश कर रही है। जिसका फोटो केसीसी तथा खाते पर चिपका हुआ है। 

यह मामला तब उजागर हुआ जब बैंक मैनेजर केसीसी की वसूली हेतु बीलवरा ग्राम में नक्टू किरार के पास पहुंचे। इस पर नक्टू किरार और उसके पुत्र ने उन्हें बताया कि उन्होंने न तो केसीसी बनवाई है और न ही उनका खाता इलाहाबाद बैंक में है। बैंक  मैनेजर ने जब केसीसी  पर चिपका फोटो नक्टू किरार को बताया तो वह फोटो नक्टू का नहीं था तथा गांव वालों ने भी इसकी पुष्टि की। इससे स्पष्ट हो गया कि नक्टू किरार के नाम से किसी व्यक्ति को फर्जी खड़ा कर खाता खुलवाकर केसीसी बनवाई गई है।

बैंक ने जब खातेदार नक्टू किरार के कागजातों की छानबीन की तो पता चला कि 9 दिसम्बर 2010 को नक्टू किरार के नाम से खाता खोला गया है तथा खातेदार ने खाता खुलवाने के लिए मतदाता परिचय पत्र और परिवार परिचय पत्र प्रस्तुत किया है। उस पर तथा खातेदार के फोटो पर पहचान बीके माथुर निवासी गौतम विहार कॉलोनी ने की। खाता खुलने के बाद 14 दिसम्बर 2010 को तीन लाख रूपए की केसीसी भी बनवाकर फर्जी खातेदार नक्टू किरार को दे दी गई। केसीसी के प्रारूप 5 पर साक्षी के रूप में राजाराम कोरी और रामचरण किरार निवासी बीलवरा के नाम दर्ज थे, लेकिन इनकी पहचान के कोई दस्तावेज बैंक में नहंीं थे। बीलवरा गांव में जब इन दोनों व्यक्तियों को तलाश किया गया तो पता चला कि इन नामों के व्यक्ति गांव में नहीं रहते हैं। 

पूर्व में भी आरोपी केन पर दर्ज हो चुका है धोखाधड़ी का केस 
फरियादी रीतेश शिवहरे ने कोतवाली में दिए गए आवेदन में बताया कि आरोपी रमेशचंद्र केन आदतन अपराधी है और उस पर इस तरह के मामले पहले भी दर्ज हो चुके हैं। उसके खिलाफ अपराध क्रमांक 461/11 भादवि की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120 बी का मामला पूर्व से पंजीबद्ध है। 

आदिमजाति कल्याण विभाग के प्रभारी संयोजक हैं बीके माथुर 
पुलिस सूत्रों  ने स्पष्ट किया कि इस मामले में फर्जी खातेदार की पहचान करने वाला आरोपी बीके माथुर बैंक कर्मचारी नहीं है। बताया जाता है कि आरोपी रमेशचंद्र केन उसके  मकान में किराए से रहता था। इस मामले के जांच अधिकारी प्रधान आरक्षक रामकुमार तोमर के अनुसार आरोपी बीके माथुर शासकीय सेवा में हैं और वह आदिमजाति कल्याण विभाग के प्रभारी संयोजक के साथ-साथ सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग एवं अल्प कल्याण तथा अंतव्यवसायी का भी प्रभार संभाले हुए हैं। जब श्री तोमर से पूछा गया कि आरोपी बीके माथुर के बयान हुए अथवा नहीं तो उन्होंने कहा कि आरोपी के बयान नहीं बल्कि उनकी गिरफ्तारी होगी। 
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