राजस्थानी पशु पालक करा रहे हैं जंगलों की हरित क्रांति नष्ट

अभिषेक शर्मा, पोहरी। जिला फॉरेस्ट विभाग की पोहरी की रेंज क्षेत्र में राजस्थानी पशुपालकों द्वारा लाखों पशुओं के साथ क्षेत्र के जंगलों में आने से जंगलों की हरियाली को राजस्थानी पशु भेड़ एवं ऊंट नष्ट कर रहे हैं जबकि एक तरफ प्रशासन जंगलों को बचाकर पेड़ लगाने का नारा लगा रहा है और दूसरी तरफ राजस्थानी मारवाड़ी पशुपालकों को मिलीभगत से वनक्षेत्रांतर्गत जंगलों में पशु चराने की खुली छूट देकर जंगलों का सफाया कराया जा रहा हैं। 

पोहरी रेंज क्षेत्र  कई वन बीट में प्रतिवर्ष हजारों राजस्थानी पशुपालक बारिश होते ही लाखों की संख्या में ऊंट एवं भेड़ लेकर जंगलों में अपना डेरा जमा लेते हैं और जंगलों में रहकर स्थाई निवास बना कर हरे भरे पेड़-पौधों को चराने का काम खुले रुप में करतेहैं गौरतलब बात है कि उक्त राजस्थानी पशुओं को चराने की परमीशन वन विभाग से मात्र सैंकडों की संख्या में ली जाती है और हजारों पशु लाए जाते हैं पशु पालकों द्वारा वन विभाग से पशुओं को निकालने के पास बनवाकर जंगलों में डेरा जमा लेते हैं। कुछ समय का पास बनवाकर महीनों तक जंगल में रहकर पशु चराए जाते हैँ एवम जंगलों की हरियाली नष्ट की जा रही है।

इन जंगलों में डेरा डाले हैं राजस्थानी पशुपालक
पोहरी रेंज के अंतर्गत उमरई ,ककरा, मडख़ेड़ा, सिकंदपुरा, झलमांदा,के जंगलों में बहुतायत में राजस्थानी पशु देखे जा सकते हैं। रेंज अधिकारियों की सांठगांठ पोहरी सवरेंज क्षेत्र के जंगलों में संबंधित अधिकारी एवं वीट के नाकेदारों की सांठगांठ से राजस्थानी पशुपालक एकमुश्त रकम देकर 6 महीने का मौखिक अनुबंध करते हैं। जिस कारण वह बेखौफ अपने पशुओं को लेकर जंगलों में चराकर जंगलों का सफाया करते हैं।

इनका कहना है-
आपके द्वारा उक्त मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है। राजस्थानी इन चरवाहों को तो पहले खदेड़ दिया गया था। अब इन्हे निकलना होता है तो हम मोहना तक पहुंचने के लिए लगभग 10 दिन का समय देते है। अगर ऐसा है तो मे दिखाती हूं। कैसे ये इस क्षेत्र में आ गए है। 
कल्पिका मोहनता, सीसीएफ शिवपुरी। 
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