खतरे में नैैनिहाल: यमदूत बने बाहनों में जा रहे है आपके मासूम

इमरान अली/विकाश कुशवाह /कोलारस। जिले के कोलारस नगर सहित आस पास के इलाकों में तमाम निजी विद्यालय चल रहे हैं, जिनकी ओर से संचालित वाहन मानकों को पूरा नहीं करते। इसके अलावा विद्यालयों की ओर से कुछ ऐसे वाहनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है जो एकदम खटारा हो चुके हैं। इन वाहनों को यमदूत कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि यह खटारा वाहनों के हालात नहीं बदले तो कोई भी बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है। स्कूल सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि बच्चों को खतरे में भी डाल रहे हैं। विद्यालय प्रबंधकों की इस लापरवाही के कारण कई वाहन दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। नगर में संचालित निजी विद्यालयों में अधिकांश के पास बस समेत अन्य चारपहिया वाहनों की सुविधा है। 

इन बसों और वाहनों के परिचालन से संबंधित कुछ नियम बनाए गए हैं। ताकि ऐसे वाहनों का सुरक्षित संचालन हो सके। लेकिन इन नियमों का पालन होता कहीं दिखता नहीं है। सुत्रो के हवाले से पता चला है। ज्यादातर स्कूलो में चलने वाले वाहनो के पूर्ण रूप से जरूरी दस्तावेज बीमा, फिटनिस, जैसे दस्तावेज भी मौजूद नही है।

वहीं कुछ स्कूलो में गैस से चलने वाले छोटे वाहनो में बच्चों को बिठाया जा रहा है। वहीं ज्यादातर वाहन या तो इतने पुराने की वो कहीं भी आसानी से दम तोड़ जाते है। ऐसे वाहनो में बच्चों को सफर कराना बच्चों की जिंदगीयो से खिलबाड़ है। बताया जाता है कि जिम्म्ेादार अधिकारियो द्वारा निर्धारित स्कूल में चलने वाले वाहनो का नियमों के पालन भी सख्ती से नहीं कराए जाते। इसके कारण दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

बच्चों को स्कूल तक भेजने के साधन जुटाने में अभिभावक भी लापरवाही बरत रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों में मोटी फीस देकर बच्चों को पढऩे भेज रहे अधिकतर अभिभावक भी परिवहन व्यवस्था से समझौता करके बच्चों की सुरक्षा के प्रति उदासीन नजर आ रहे हैं। कई निजी स्कूल टाटा मैजिक, वैन को स्कूल वाहन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। 

स्कूली वाहनो मे क्षमता से अधिक बच्चे ठूंसकर ले जाए जा रहे हैं। जबकि ये हल्के वाहन किसी भी सुरक्षा लिहाज से उचित नही है। कुछ स्कूल बसें भी क्षमता से अधिक बच्चे बैठाकर भेड़ बकरियों की तरह ठूंस कर ले जा रही है। वाहन चालक औसत खर्चा कम होने की बचत के चक्कर में क्षमता से दो गुना अधिक बच्चे ले जा रहे हैं। जिममेदार विभाग आंख बंद किए हुए हैं। 

पिछले हादसे से भी नही लिया सबक
दो वर्ष पहले भी हाईवे किनारे कोलारस पब्लिक स्कूल की खटारा बस पलटने से बच्चे मौत के मुंह में जा चहुंचे थेे। इस हादसे में कई बच्चों को गंभीर चोटे भी आई थी। और बच्चे लंबे ईलाज के बाद स्वस्थ हो सके थे। पुलिस भी निजी स्कूलों के क्षमता से अधिक बच्चे लादकर चलने वाले हल्के वाहनों के प्रति लापरवाह नजर आती है। 

ऐसे वाहनों ने नौनिहालों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है। जिससे कोलारस नगर में परिवहन महकमे की उदासीनता देखने को मिलती है। यहां साल में एक या दो बार ही वाहनो की चैकिंग की जाती है। जिसके चलते स्कूली वाहनो में स्कूल संचालको द्वारा नियमो में कोताही वरती जाती है। वहीं विभागीय कार्रवाई ही बताती है कि स्कूल संचालको द्वारा नियम तोड़े जाते है।

ओवरलोड वाहन मिला तो नपेगा स्कूल प्रबंधन: एसडीओंपी
कोलारस एसडीओपी सुजीत सिंह भदौरिया ने हमारे संवाददाता से बात करते हुूए बताया की सुरक्षा और बड़ते हादसो की गंभीर देखते हुए हमने मिशन सुरक्षा की शुरूआत की है जिसके तहत एक के बाद एक स्कूल कॉलेजो के माध्यम से बच्चों को सडक़ सुरक्षा और वाहन संबंधित नीयम समझाए जा रहे है। और छात्रो से उम्मीद की जा रही है। 

वह अपने परिजनो और अपने दोस्तो को भी बताऐं। इसके अलावा बच्चों की यातायात संबंधी सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करना स्कूल प्रशासन व पुलिस प्रशासन का दायित्व तो है ही साथ ही प्राथमिक जिम्मेदारी माता पिता की भी बनती है। अभिभावक स्कूल में दाखिले से पूर्व परिवहन सुविधा को भी चेक करें। जिन स्कूलों ने रूटों पर अपनी बस सुविधा दे रखी है। 

उन रूटों पर बसों में ही बच्चों को स्कूल भेजें। उन बसों में भी कोई बच्चा खड़ा होकर नहीं चलना चाहिए। एक कंडक्टर भी होना चाहिए साथ ही एक टीचर भी बच्चों के साथ होना अनिर्वाय है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार और सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरे लगाने भी अनिवार्य हैं। अगर नियम विरूद्ध तरीके से कोई भी स्कूली वाहन परिवहन करते मिला या ओवरलोड मिला तो स्कूल प्रबंधक पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। 

स्कूली वाहनों के लिए निर्धारित है यह नियम
-स्कूल वाहन पंजीकरण के दौरान ड्राइवर का पंजीकरण जरूरी है। 
-ड्राइवर के पास पांच वर्ष पुराना ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। 
-सुरक्षा के लिए वाहन में अनुभवी पुरुष और महिला सहायक साथ होंना चाहिए।
-बस में फस्र्ट ऐड बॉक्स होना चाहिए।
-बस के शीशोंपर छड़ की रेलिंग लगी हो।
-अटेंडेंट यानि चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, आईकार्ड और वाहन के कागजात होने चाहिए।
-विद्यालय की ओर से बस संचालन के लिए प्रदत्त प्रमाण पत्र हो।
-यदि स्कूल की निजी बस हो तो तो पीले रंग में होनी चाहिए।
-वाहन पर विद्यालय या इसके प्रबंधक का पता और दूरभाष नंबर होना चाहिए।
-वाहनो में जरूरी दस्तावेज सहित बीमा और फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
-विद्यालयो में गैस से चलने वाले वाहनो से बच्चो को नही बिठाया जाए।
-स्कूल बाहनों के स्टाफ का पुलिस बेरीफिकेशन अनिवार्य है।
-चालक निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार नहीं बढ़ाएंगे।
-सभी स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर के साथ अलार्म अनिवार्य है। 
-बस के कर्मचारियों को निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना। 
-स्कूल बसों में दो इमरजेंसी गेट की व्यवस्था करानी होगी।
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