रेत माफियाओं पर अंकुश लगाने अब ऑनलाईन मिलेगी रेत की रसीद

शिवपुरी। वह दिन दूर नहीं जब लोगों को ऑनलाइन रेत मिल सकेगी। इससे करैरा सहित पूरे प्रदेश के रेत माफियाओं का खेल खत्म हो जाएगा। करैरा अनुविभाग क्षेत्र के ग्राम कल्याणपुर, भासड़ा, बिलोनी, कटेंगरा, सिलरा, मड़ीखेड़ा डेम के पास, धमकन, अदोरा, दीवट, बाँसगढ़ की झाड़ी, दिदावली, धवारा, सीहोर, कुचलोंन, कालीपहाड़ी (नरवर), सिलानगर, रेहरगवां, जेरवा के अलावा एक दर्जन गांवो सहित सबसे ज्यादा रेत निकासी अभ्यारण से हो रही है, रेत माफिया इस कदर सक्रिय हैं कि रातों रात नदियों का सीना छलनी कर देते हैं। 

उनका नेटवर्क इतना तगड़ा है कि राजस्व, वन, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन के दबिश देने के पहले ही भाग जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन ठेकेदारों को उठाना पड़ रहा है, जो करोड़ों की रायल्टी चुकाने के बाद भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इन सबसे बचने के लिए सरकार नई रेत नीति बनाने जा रही है। खास बात यह है कि रेत खनन तथा विपणन की नई नीति कैसी हो, इसके लिए नागरिक भी सुझाव दे सकते हैं। सरकार ने 5 सितंबर तक सुझाव मांगे हैं। कोई भी व्यक्ति अपना सुझाव वेबसाइट पर दे सकता है।

प्रस्तावित नई नीति को खनिज विभाग की वेबसाइट ekhanij.mp.gov.in एवं मप्र शासन की वेबसाइट mp.mygov.in पर प्रदर्शित किया गया है। नई नीति के लिए खनिज विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर की एक कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, पर्यावरणविद तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए थे। इसके बाद खनिज विभाग द्वारा रेत खनन एवं विपणन नीति का प्रारूप तैयार कर इस पर प्रदेश के सभी आयुक्त, आईजी, कलेक्टर, एसपी तथा जन सामान्य से सुझाव आमंत्रित किए थे। 

इन सुझावों के परीक्षण उपरांत तेलंगाना, छत्तीसगढ़ राज्य एवं प्रदेश में वर्तमान में प्रचलित रेत खनन नीति को समाहित करते हुए विभाग ने नवीन रेत खनन एवं विपणन नीति तैयार की है। जिले के आसपास की खदानों पर यूपी तथा लोकल के रेत माफियाओं की नजर है। लगातार अवैध रूप से खनन करने वाले माफियाओं को रोकने के लिए सरकार नई रेत नीति लागू करने वाली है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नवंबर या दिसंबर से नई रेत नीति के तहत लोगों को रेत मुहैया कराई जाएगी। 

सिर्फ पंजीकृत वाहनों से हो सकेगा रेत का परिवहन
शासन द्वारा बनाई जा रही नई रेत नीति के तहत अब विक्रय ऑनलाइन रेत बुकिंग पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इसके तहत उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन रेत बुकिंग की जाएगी। जिसके बाद उपभोक्ता के पास पंजीकृत वाहन से ही रेत की सप्लाई की जाएगी। जिसकी लगातार मॉनीटरिंग की जाएगी। यहां तक कि ट्रकों से भी रेत नहीं मंगाई जा सकती है। रेत का परिवहन ट्रालियों से ही हो सकेगा। नई नीति से अनुविभाग सहित समूचे प्रदेश में निश्चित ही रेत के अवैध कारोबार को रोका जा सकेगा। 

ऐसे मिलेगी रेत
प्रस्तावित नई नीति में मुख्य रूप से प्रस्तावित किया गया है कि खदानों का चिह्नांकन खसरा के आधार पर न करके रेत के भौगोलिक विस्तार को आधार लिया गया है, जिसकी खनन योजना जरूरी पर्यावरण अनुमति कलेक्टर द्वारा ली जाएगी। रेत हार्वेस्टिंग एवं विक्रय का कार्य अलग-अलग एजेंसी के माध्यम से डिपो पर संग्रहित कर वहां से किया जाएगा। खदानों का संचालन पंचायतों एवं स्थानीय निकाय के नियंत्रण के अधीन होगा। डिपो पर रेत का विक्रय ऑनलाइन रेत बुकिंग पोर्टल के माध्यम से और डिपो पर रेत की दर का निर्धारण पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर जिला स्तर पर गठित एक समिति द्वारा किया जाएगा। रेत का परिवहन पंजीकृत वाहनों से प्रस्तावित किया गया है। 

पंचायत को मिलेगी आधी रायल्टी
नई रेत नीति से सीधा फायदा पंचायतों को भी होगा। समिति द्वारा तय कीमत पर डिपो से जो रेत बेची जाएगी, उसमें से आई आधी रायल्टी संबंधित ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय के खाते में जाएगी। रॉयल्टी की 50 प्रतिशत राशि स्थानीय निकाय को- खदानों के संचालन से प्राप्त रॉयल्टी राशि में से 50 प्रतिशत राशि संबंधित ग्राम पंचायत/नगरीय, 30 प्रतिशत राशि जिला कलेक्टर तथा 20 प्रतिशत राशि राज्य शासन/निगम को प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। नागरिकों को रेत परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सेंड ट्रांसपोर्ट टैक्सी की व्यवस्था करने का प्रावधान किया है।

इनका कहना है
प्रदेश सरकार द्वारा अब ऑनलाईन रॉयल्टी रसीद लेकर आप रेत खरीद सकते हैं यह प्रक्रिया 18 अगस्त से प्रारंभ कर दी गई है। जिसके आदेश जिलाधीश द्वारा सभी खदान संचालकों को जारी कर दिए हैं। 
सुजान सिंह 
खनिज अधिकारी शिवपुरी 
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