दुर्घटना में मृत शिक्षक के परिवार की मदद के लिये सोशल मीडिया के सहारे जुटाए एक लाख

बदरवास। पीडि़त तथा परेशान की मदद करना तथा उसकी दु:ख परेशानियों में शामिल होना असली मानवधर्म ओर परोपकार है। इस बात का जीता जागता उदाहरण बदरवास में शुक्रवार को एक सडक़ दुर्घटना में मृत शिक्षक अर्जुन कुशवाह के शोक संतप्त ओर गहरे सदमे के शिकार परिवार की मदद के लिए  चलाये जा रहे मदद अभियान में देखने को मिल रही है। 

जानकारी देते हुए अभियान से जुड़े अध्यापकों ने बताया कि बदरवास विखं के सेमरीखुर्द के सरकारी स्कूल में पदस्थ सहायक अध्यापक अर्जुन कुशवाह का गत शुक्रवार को स्कूल जाते समय ट्रक दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था। चूंकि मृतक अर्जुन कुशवाह की पारिवारिक आर्थिक स्थिति खराब है और परिवार के भरण पोषण की समस्या पैदा हो गई। इस समस्या को समझते हुए परिवार की मदद हेतु उनके ही विभाग से जुड़े शिक्षक आगे आये और सहायता हेतु बीड़ा उठाया। इसके लिए सोशल मीडिया की मदद ली गई और शिक्षा विभाग से जुड़े व्हाट्सएप्प ग्रुपों पर मृतक साथी अर्जुन कुशवाह की आर्थिक मदद हेतु आगे आने हेतु अभियान चलाया फलस्वरूप लोग अपने साथी की मदद हेतु जिलेभर से स्वप्रेरणा से आगे आने लगे तथा देखते ही देखते यह संख्या लगभग दो सैकड़ा तक पहुंच गई।
 
जिसमें मदद हेतु अधिकांश शिक्षक साथी रहे तथा इनके अलावा अन्य विभागों तथा व्यवसाय से जुड़े लोग भी रहे।इस आर्थिक मदद के संग्रह हो जाने पर मृतक शिक्षक अर्जुन कुशवाह के परिवार को ये राशि सौंप दी जाएगी। गौरतलब है कि मृतक सहायक अध्यापक था और शासन स्तर से अध्यापक संवर्ग के व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके भरणपोषण के लिए कोई ठोस मदद का प्रावधान नहीं किया गया है ।

इन सभी बातों को नजर में रखते हुए सभी अध्यापक साथियों ने अधिकारी कर्मचारी के सहयोग ओरस्वयं ही अपने स्तर से मृत अर्जुन कुशवाह की मदद का बीड़ा उठाया और सहायता का यह कारवां लगातार बढ़ता ही जा रहा है ओर जिले के साथ ही अन्य जिलों के अध्यापक भी मृत शिक्षक के परिवार की पीड़ा को समझते हुए आर्थिक मदद हेतु आगे आ रहे हैं। व्हाट्सएप्प ग्रुप पर लगातार मुहिम चलाई जा रही है जिसमें अनेक अध्यापक लगे हुए हैं। 

अपने किसी साथी की अचानक मौत के बाद आर्थिक मदद हेतु ऐसा अभियान अपने आप में अनूठा है तथा सभी जगह इस परोपकार के कार्य के सराहना हो रही है। इस अनूठे ओर विपत्ति में मदद के अभियान में जिले भर का अध्यापक शिक्षक समुदाय तथा सामाजिक भावना रखने बाले लोग मिशन के तौर पर जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि मृतक अर्जुन कुशवाह के पिता का निधन भी तीन माह पहले हो चुका है तथा दो बच्चे हैं । अर्जुन के अलावा अब परिवार में परिवार के भरण पोषण का कोई साधन नहीं है।
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