लापरवाही: नही बनाए जा रहे है महाराणा प्रताप के वशंजो के प्रमाण पत्र

शिवपरी। देश मेें ऐसी कई जातियां है जिनकी कोई पहचान नही है वे एक ही स्थान पर नही रहती है। इनका कोई घर नही है। यह हमेश भ्रमण करती रहती  है। इनमें एक जाति आपने देखी होगी जो बैलगाडी से घुमती रहती है। जिन्है आप और हम लोहपीटा के नाम से जानते है। यह मूलत: भील जाति के लोग हैं जो अपने आप को महाराणा प्रताप के वशंज कहते है। इसी तरह की कई घुमक्ड जातियो को विमुक्त एंव अद्र्वघुमक्कड ज.जा.में रखा है। 

विमुक्त घुमक्कड समाज सेवा समिति भोपाल के शिवपुरी अध्यक्ष डॉ. अशोक बेडिय़ा ने बताया है कि एक ओर शासन द्वारा विमुक्त एवं अद्र्धघुमक्कड  ज.जा. वर्ग के लोगों को विकास मुख्य धारा में लाने के लिए योजनायें बनाई जा रहीं हैं, घोषणायें की जा रही है कि परन्तु जिला स्तर पर उनका क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। 

इस कारण शासन की योजनायें मंशानुरूप धराशायी हो रही हैं। डॉ. बेडिया ने बताया कि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा संचालनालय विमुक्त घुमक्कड एवं अद्र्धघुमक्ड ज.जा. विकास भोपाल के आदेश 6 मई 2017 के क्र. 46 में समस्त अनुभागों के अनुविभागीय अधिकारियों को पत्र क्र. 3163 जो की 27 मई 2017 को जारी कर विमुक्त एवं अद्र्धघुमक्कड ज.जा. वर्ग के जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने एवं जारी जाति प्रमाण पत्रों की जानकारी प्रतिमाह आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी को भेजने के आदेश दिए हैं परन्तु दो माह से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं। 

जबकि वर्तमान कलेक्टर द्वारा उक्त जनजाति वर्ग के जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने की पहल की जा रही है। परन्तु जमीनी स्तर पर कार्यवाही अपेक्षित है। ज्ञात हो कि विमुक्त घुमक्कड एवं अद्ध्र्र घुमक्कड जाति समाज का ऐसा वर्ग है जो कि शासन की योजनाओं के लाभों से सर्वाधिक वंचित है जाति प्रमाण पत्र के बिना उन्हें शासन की अनेकों योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड रहा है। 

डॉै.बेडिया ने प्रशासन से अपेक्षा की है कि शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन शीघ्रातिशीघ्र विमुक्त एवं अद्र्धघुमक्कड ज.जा. वर्ग के जाति प्रमाण पत्र जारी करे। 
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