पानी में रहकर मगर से बेर: क्या दोशियान और काग्रेंसीयों के बीच होगा राजीनामा?

शिवपुरी। नगरपालिका द्वारा सिंध जलावर्धन योजना के लिए नियुक्त एजेंसी दोशियान के महाप्रबंधक महेश मिश्रा ने ही नगरपालिका के अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह और उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा तथा 50 अन्य कांग्रेसी नेताओं पर मामला दर्ज होने के बाद अब यह चर्चा प्रबल है कि क्या यह जंग और आगे बढ़ेगी या फिर इसका पटाक्षेप होगा। 

कांग्रेस के एक  नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह लड़ाई ठीक ऐसी है मानो पानी में रहकर मगर से बैर मोल लिया हो। इसलिए या तो दोशियान नगरपालिका के निशाने पर होगी अथवा कोर्ट में जाने के पहले ही इस मामले में राजीनामा हो जाएगा। सूत्र बताते हैं कि मध्यस्थता के लिए प्रयास भी शुरू हो गए हैं। 

सिंध जलावर्धन योजना की एजेंसी दोशियान के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि नगरपालिका और राज्य शासन  के बीच वह किस तरह से समन्वय बनाए। क्योंकि नगरपालिका जहां कांग्रेस की हैं वहीं प्रदेश में भाजपा सत्तासीन है। नगरपालिका अध्यक्ष कांग्रेसी मुन्नालाल कुशवाह हैं वहीं स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार की मंत्री भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया हैं। 

निश्चित रूप से अधिकारों के मामले में राज्य शासन का पलड़ा भारी है लेकिन जहां तक दोशियान को भुगतान मिलने का सवाल  है तो चैक पर हस्ताक्षर मुन्नालाल कुशवाह के ही होते हैं। नपाध्यक्ष कुशवाह ने इसलिए महाप्रबंधक महेश मिश्रा को धमकी भी दी थी कि चैक तो मुझसे ही लोगे। इसलिए दोशियान धर्मसंकट में है कि  वह नगरपालिका और राज्य शासन में से किसे  चुने। 

परंतु 5 जुलाई को जब नगरपालिका पदाधिकारी लगभग समूची जिला कांग्रेस को लेकर मड़ीखेड़ा पहुंचे तो परिस्थिति ऐसी बनी कि महाप्रबंधक मिश्रा को उनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी। हांलाकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सत्ता के इशारे पर यह कायमी हुई है। अब देखना यह है कि यह विवाद और आगे बढ़ता है अथवा दोनों पक्षों के बीच कोर्ट जाने के पहले ही राजीनामा हो जाएगा। 
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