Monday, July 03, 2017

किसानों के ऋण माफ और दुर्दशा के चलते सिंधिया ने लिखी मोदी को चिट्टी

शिवपुरी। गुना-शिवपुरी लोकसभा से सांसद और कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को मध्यप्रदेश में हो रही किसानों की दुर्दशा के चलते चिट्टी लिखी है। इस चिट्टी में क्या लिखा है पढि़ए सशब्द.........

प्रिय
माननीय प्रधानमंत्री महोदय,
भारत सरकार,साउथ ब्लॉक नई दिल्ली

मैं आपका ध्यान मध्यप्रदेश में तेज़ी से बिगड़ रहे कृषि संकट की ओर आकर्षित करना चाहूंगा। पिछले महीने 6 जून को, मंदसौर में अहिंसक रूप से अपने अधिकार के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे निहत्थे किसानों पर राज्य पुलिस द्वारा गोलीबारी में 6 किसान मारे गए। इस दुखद घटना के बाद, न तो मुख्यमंत्री ने दोषी अफसरों पर कार्यवाही की ओर न ही किसानों की समस्याएं सुनने और हल करने के कोई ठोस प्रयास किये है।

मैं दुखी मन से आपको सूचित कर रहा हूँ कि मध्यप्रदेश सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता और उपेक्षा का ही परिणाम है की आज मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। मंदसौर गोलीकांड (6 जून) से 29 जून तक 42 किसान आत्महत्या कर चुके है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा अभी तक इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने और किसानों को आशा दिलवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाये गए हैं।

हालात का जायज़ा करने मैंने पिछले एक महीने में मध्यप्रदेश के अनेक जिलों के दौरे किये है। मंदसौर की घटना के बाद, खासकर खरगोन,मंदसौर, उज्जैन, देवास, सीहोर आदि जिलों के दौरों के दौरान जो ज़मीनी हकीकत सामने आयी, वह बड़ी गम्भीर है। कृषि की उत्पादक सामग्री की लागत तेज़ी से बढ़ती जा रही है, जबकि फसल के दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। 

फसल का सही दाम, सही समय पर न मिलने के कारण, किसानों के लिए बैंक, समूह और साहूकारों से लिए गए कर्ज चुकाना नामुमकिन हो गया है, और कर्ज़़ की वसूली के दबाव में अपनी जान लेने को मजबूर हो गए है। राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो के मुताबिक़, 2010 से 2015 के बीच मध्यप्रदेश में 6594 किसान आत्महत्या कर चुके है। इनमें से 80% (लगभग 5300) किसानों ने अपनी जान इसलिए ली क्योंकि वह साहूकारों से लिए गए कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ थे।

इसके बावजूद, किसानों पर कर्ज़़ की समस्या को राज्य सरकार स्वीकार ही नहीं करना चाहती। पिछले एक महीने से प्रतिदिन ही किसान आत्महत्या की सूचना प्राप्त हो रही है, लेकिन राज्य सरकार स्थिति पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। यह विषय एक राजनैतिक मसला नहीं, बल्कि संवेदनशीलता एवं मानवीयता का मसला है। इस पत्र के माध्यम से मैं आपको मध्यप्रदेश में किसानों की आवाज़ पहुँचाने की कोशिश कर रहा हूँ।

मध्यप्रदेश में कृषि संकट से जूझ रहे किसानों की पीड़ा को ध्यान में रखकर, इसके समाधान हेतु, मेरे आपसे तीन अनुरोध है।
पहला- ऋणमाफी - आप कृपया, राज्य सरकार को शीघ्र-अतिशीघ्र ऋणमाफी लागू करने के निर्देश दें। जब उत्तरप्रदेश, पंजाब,महाराष्ट्र, कर्नाटका सरकारों ने ऋणमाफी लागू कर दी है, तो मध्यप्रदेश सरकार क्यों नहीं कर सकती ?

दूसरा- वर्तमान न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों की लागत की भरपाई नहीं हो पा रही है, अत: न्यूनतम समर्थन मूल्य में केन्द्र सरकार द्वारा वृद्धि की जाए।

तीसरा- कृषि उपज मंडी में जारी अनियमितताओं को दूर किया जाए, जिससे प्रत्येक किसान अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बगैर किसी विलम्ब के आसानी से बेच सके।

मुझे आशा है कि आप उपरोक्त विषय पर गंभीरता से विचार करते हुये दिशा-निर्देश देंगे।

        आपका 
(ज्योतिरादित्य मा. सिंधिया)

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