पत्रकारों को धमकाने बाले लकड़ी माफिया पर कार्यवाही नहीं होने पर पत्रकार देंगे धरना

कोलारस। पत्रकारिता करना बेहद मुश्किल काम है क्योंकि पत्रकारों की सुरक्षा संबंधी कोई विशेष कानून नहीं है। और प्रशासन भी पत्रकारो पर होते अत्याचारो पर गंभीर नही है। जिससे नियम विरूद्ध कार्य करने वाले दबंग लोगों के हौंसले बुलंद बने रहते हैं। ऐसा ही एक मामला कोलारस क्षेत्र में प्रकाश में आया है जहां विगत 5 जुलाई की रात्रि पत्रकार विकाश कुशवाह और संजय चिड़ार को सूचना मिली कि अवैध रूप से लकड़ी का परिवहन ट्रेक्टर के माध्यम से किया जा रहा है इसके बाद पत्रकारो ने उक्त बात की सूचना रेंजर को दी तो वन विभाग की टीम ने वायपास रोड से एक ट्रेक्टर को पकड़ लिया गया। जबकि दूसरा ट्रेक्टर क्रमांक एमपी 33 ए 9952 मौके से भागने में सफल रहा, उक्त ट्रेक्टर, ट्रेक्टर मालिक हरिचरण ओझा पुत्र अशोक ओझा निवासी शिवपुरी के नाम पंजीकृत है। पकड़े गए ट्रेक्टर को वन विभाग की टीम ने वन विभाग के कार्यालय पर लाकर रख दिया। 

इसके बाद हरिचरण पत्रकार विकास कुशवाह, संजय चिड़ार के घर अपने साथीयो के साथ शराब के नशे में रात्रि में पहुंचकर घर पर घुसकर गाली गलौंच करते हुए हाथ पैर तोडने की धमकी दी। जिसके बाद रात के समय में ही पत्रकारो द्वारा कोलारस एसडीओपी सुजीत सिंह भदौरिया को मामले कि जानकारी दी गई। जिसके बाद भी हरिचरण ने संजय को मोबाइल पर जान से मारने की धमकी दी जिसकी रिकॉर्डिंग भी संजय द्वारा मोबाइल में की गई। घटना के विरोध में दूसरे दिन पत्रकारों ने पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुशील काले के नेतृत्व में एसडीएम आरके पांडे और एसडीओपी को ज्ञापन सौंपकर आरोपी के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। लेकिन चार हफते बीत जाने के बाद भी मांफिया पुलिस गिरफत से बाहर है। और पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है। जिससे पत्रकारों में रोष व्याप्त है। मांफियाओ कि धमकी से आहत और पुलिस कार्यप्रणाली से परेशान पत्रकार कोलारस थाने पर धरना प्रर्दशन कि योजना बना रहे है। 

यहां बताना होगा कि हरीचरण द्वारा लकड़ी का कार्य करता है और वन विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर लकड़ी का अवैध परिवहन करता है। सुत्र बताते है। कि केालारस थाने कि सीमा से ट्रेक्टर निकलने का भी सीमा शुल्क दिया जाता है। इसी के चलते पुलिस कायमी करने से कतरा रही है। पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न करने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने हैं। यह मामला नगर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। बुद्धिजीवियो का कहना है। कि जब पत्रकारो के मामले में पुलिस गंभीरता नही दिखा रही तो आम लोगो के साथ कोलारस थाने में कैसा व्यवहार होता होगा। यह अपने आपमें विचार करने बाली बात है।

इनका कहना - 
मामला गंभीर है तीन हफते से ज्यादा बीतने के बाद भी कोलारस पूलिस ने पत्रकारो से अभ्रदता करने वाले और जान से मारने कि धमकी देने वालो के खिलाफ कोई कार्यवाही नही कि है। इस विषय पर हम जल्द ही जिला पुलिस अधिक्षक को आवगत कराया जाएगा। और तीन दिन के अंदर कार्यवाही न होने पर कोलारस थाने पर पत्रकारो द्वारा धरना प्रर्दशन किया जाएगा। जब क्षेत्र में पत्रकार ही सुरक्षित नही है। तो आम आदमी का क्या होता होगा। 
मुकेश रघुवंशी (म.प्र. पत्रकार ब्लॉक अध्यक्ष)

मुझे इस मामले में बताया गया था कि कुछ दिन पहले रात में पत्रकारो के साथ लकड़ी ले जा रहे ट्रेक्टर चालको ने अभ्रदता और घर पर आकर जान से मारने कि धमकी दी थी। जिसके दुसरे दिन भी पत्रकारो ने मुझे आवेदन दिया था जिसे मेंने कार्यवाही के लिए कोलारस थाना प्रभारी को भेज दिया था। लेकिन पता नही क्युं अभी तक कार्यवाही नही की गई है। थाना प्रथारी उसमें कोई रूची नही ले रहे है। अभी थाना प्रभारी छुटटी पर है उनके आने के बाद अब इस विषय पर एसपी साहब से बात की जाएगी। सभी को सुरक्षा मुहैया कराना हमारा कर्तव्य है। जल्द उचित कार्यवाही कराई जाएगी।
सुजीत सिंह भदौरिया (एसडीओपी कोलारस)
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