Tuesday, July 11, 2017

40 वर्ष तक कब्रिस्तान के लिए लड़ाई, जब फैसला आया तो उसी में सुपुर्दे खाक हो गया

मुकेश रघुवंशी लुकवासा। एक कहावत है कि न्याय देर से मिला तो वह न्याय नही होता। लुकवासा के एक व्यक्ति ने कब्रिस्तान से अतिक्रमण हटाने के लिए लड़ाई लडी। इस लड़ाई में उसकी पूरी जवानी निकल गई। बुढापे में न्यायालय ने फैसला सुनाया, लेकिन उस फैसले को अमल में नही ला रहा है। और अतं में वह अपनी जिंदगी की लडाई हार कर उसी कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक हो गया। 

जिले के कोलारस तहसील क्षेत्र के लुकवासा पंचायत में रहने वाले अजमेरी शाह पुत्र गुल अहमद शाह निवासी लुकवासा पिछले 40 साल से वक्फ बोर्ड कमेटी के लुकवासा सदर थे। वक्फ बोर्ड कमेटी के सदर बनते ही उन्हें पता चला कि लुकवासा कब्रिस्तान की जमींन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान बनाा लिए है। 

जब इस बात की शिकायत अजमेरी शाह ने तहसील कार्यालय में की तो तहसील ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा और कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते अजमेरी शाह ने हार न मानते हुए इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाना उचित समझा। 

कोर्ट में पहुंचते ही कोर्ट ने उक्त मामले की सुनवाई पूरे 23 साल तक चली। बताया जा रहा है कि लुकवाासा के कब्रिस्तान का अतिक्रमण का मामला वक्फ बोर्ड कमेटी भोपाल सहित ग्वालियर हाईकोर्ट मे 23 साल तक चलता रहा। बीते तीन साल पहले इस मामले मामले में हाईकोर्ट और वक्फ बोर्ड कमेटी ने फैसला सुनाते हुए इस जमींन पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को हटाने का आदेश दिया। 

परंतु समय की मार और प्रशासनिक हीला हबाली का शिकार अजमेरी ऑफिस-ऑफिस खेलते खेलते अपनी चप्पल तक घिस चुके थे। लेकिन आज दिनांक तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बीते रोज अजमेरी ने अपने भाई सुलेमान शाह को बुलाकर कहा कि अब तुम इस मामले को अपने हिसाब से देखों में तो थक गया हूॅ। 

अतिक्रमण की लड़ाई के पूरे कागजात सौपने के 24 घटें बाद अजमेरी का इंतकाम हो गया। पूरी जवानी से लेकर बुढापे तक लडने वाले अजमेरी को इसी कब्रिस्तान में दफनाया गया है। लेकिन अजमेरी की लड़ाई अभी तक जारी है अजमेरी की ओर से इस लड़ाई को लुकवासा वक्फ कमेटी के नए सदर सुलेमान शाह ने लडने की तैयारी कर ली है। 

अब इस मामले को लेकर सुलेमान शाह आज एसडीएम आरके पाण्डे के पास पहुंचे। जहां एसडीएम ने इस मार्मिक घटनाक्रम को सुनकर तत्काल इन अतिक्रमणकारी बाबूलाल जैन पुत्र अनूप चंद जैन, शंकरिया पुत्र अर्जुन लाल चिड़ार, कैलाश नारायण नामदेव पुत्र किशनलाल टेलर, बीरेन्द्र कुमार पुत्र सुरेशचंद्र, कल्याण पुत्र सुगंध चन्द्र, शिवनारायण शर्मा पुत्र बैजनाथ शर्मा, ओमप्रकाश पुत्र जगन्नाथ चौबे, पूरन सिंह पुत्र अर्जुन सिंह रघुवंशी, हरीबल्लभ पुत्र शंकर लाल जैन को नोटिस देकर जल्द हटाने का आश्वासन दिया है। 

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