वर्षो पुराने पेड़ को शहर के बीच से काट रहे थे माफिया, दबौचे

शिवपुरी। जिले में समय-समय पर भूमाफिया, रसद माफिया, तेल माफियाओं के सक्रिय होने के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अब पेड़ माफिया भी सक्रिय हो गए हैं जो ठेका लेकर किसी भी पेड़ को काट सकते हैं। बताया तो यहां तक जाता है कि इन पेड़ माफियाओं की पकड़ बहुत ऊपर तक है जिसके चलते ये किसी भी पेड़ को बेखौफ अंदाज में काटकर जमींदोज कर सकते हैं। 

ऐसा ही मामला एक फिजीकल रोड पर स्थित आस्था का केन्द्र मोती बाबा मंदिर प्रांगण में खड़ा सैंकड़ा वर्ष पुराने पीपल के पेड़ को काटने का सामने आया है, जहां दो लोगों द्वारा उक्त पेड़ को काटा जा रहा था और इनके द्वारा हजारों रुपए की लकड़ी को काटकर ट्रेक्टर-ट्रॉली में भरकर ढोया जा रहा था। इस घटना की किसी श्रद्धालू ने एसडीएम रूपेश उपाध्याय को खबर कर दी।

मामले की गंभीरता को भांपते हुए एसडीएम श्री उपाध्याय द्वारा नगरपालिका की टीम एवं तहसीलदार को मौके पर भेजा। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर हजारों रुपए कीमत की काटी गई लकड़ी व पेड़ को काटने में उपयोग की जा रही कुल्हाड़ी, रस्सा सहित पेड़ काट रहे लोगों को पकड़ लिया गया। अपुष्ट सूत्रों की मानें तो इन पेड़ माफियाओं की जड़े इतनी मजबूत हैं कि प्रशासन के नियम कायदों को ठेंगा दिखाकर पेड़ काटने का ठेका ले लेते है और बेखौफ अंदाज में वन विभाग के क्षेत्र तक से पेड़ को काट लेते हैं। बताया जाता है इनकी नगरपालिका और वन विभाग के आलाधिकारियों से अच्छी खासी सेटिंग है।

एसडीएम की सक्रियता से बचा सैंकड़ों वर्ष पुराना पेड़
जैसे ही एसडीएम रूपेश उपाध्याय को मामले की जानकारी लगी तो उन्होंने बिना समय गंवाए मौके पर टीम भेज दी अन्यथा की स्थिति में वर्षों पुराना यह पीपल का पेड़ जमीदोज हो जाता है, वहीं इसी मामले में जब नपा सीएमओ से संपर्क साधा गया तो वह यह कहते हुए पल्ला झाड़ते नजर आए कि मैं तो अभी बाहर हूं और आप शिकायती आवेदन भिजवा दो। यहां बताना होगा कि यदि श्रद्धालु नपा सीएमओ के भरोसे रहते तो उक्त पेड़ को पेड़ माफिया जमीदोज कर अपना काम कर चुके होते।

नपा की कार्यप्रणाली संदिग्ध
सालों पुराने पेड़ को काटने का नगर पालिका द्वारा कोई आदेश नहीं दिया गया था, परंतु शहर के हृदय स्थल पर इतना पुराना पेड़ काटना और नगर पालिका प्रशासन आया भी तो उन्होंने पेड़ काटने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं की, न ही उन लोगों से ये जाना की उन्हें किसने ठेका दिया था। कार्यवाही के नाम पर नगर पालिका कोई सख्त कदम न उठाना इनकी कार्पणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि इन लोगो को पुलिस के हाथों सौंपा जाये तो यक़ीनन एक बड़े पेड़ माफिया के रैकेट का खुलासा हो सकता है जिन्होंने चंद पेसों की खातिर प्रकृति से खिलवाड़ किया और कर रहे हैं।

मोती झारा नामक बीमारी ठीक करने के लिए प्रसिद्ध है मोती मंदिर
यहां बताना होगा कि शहर के फिजीकल रोड पर स्थित 100 वर्ष से भी अधिक पुराना मोती बाबा मंदिर पर सैंकड़ों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं की मानें तो इस मंदिर पर आने से मोती झारा नामक बीमारी मंदिर पर मात्र प्रसाद चढ़ाने से ठीक हो जाती है। इसी मंदिर प्रांगण में सैंकड़ों वर्ष पुराना पीपल का पेड़ है जिस पर भक्तगण बड़ी आस्था से दीपक लगाकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। ऐसे में आज यदि इस पेड़ को काट दिया जाता तो भक्तों की आस्था के खिलवाड़ होता, किंतु एसडीएम की सक्रियता से आज इस पेड़ को नया जीवन मिला है।
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