सहरिया क्रांति : कंजर शराब ने छीना गांंवों का चैन, बिक्री जोरों पर, सौंपा ज्ञापन

शिवपुरी। आबकारी एवं पुलिस की घोर लापरवाही के कारण नरवर मगरोनी क्षेत्र में इन दिनों कंजर विहस्की का चलन एकाएक जोर पकड रहा है, जिससे सस्ती दारू मिलने से 10 से 12 साल तक के छोटे बच्चे भी इसके आदी होते जा रहे हैं, वहीं आबकारी विभाग को लाखों रूपये की राजस्व क्षतिपूर्ति  हो रही है। आज जिला मुख्यालय पर नरवर मगरोनी से आई एक सैंकड़ा से अधिक आदिवासी महिलाओं ने जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को सहरिया क्रांति के बैनर तले ज्ञापन सौंपा एवं कंजर व्हीस्की व अवैध शराब बेचने वालों पर प्रतिबन्धात्मक कार्यवाही करने की मांग की। इनका कहना है कि आबकारी विभाग एवं पुलिस खानापूर्ति करके कागजों में एक या दो छोटे छोटे केस बनाकर इतिश्री कर लेती है। 

हजारों लीटर अवैध कच्ची शराब नरवर-मगरौनी के निजामपुर, पीपलखाड़ी, ख्यावदा, मोहनी और भीमपुर गांंव में कंजर जाति के लोगों द्वारा घातक रसायनों से शराब तैयार की जा रही है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही घातक है।

आबकारी और थाना पुलिस इन से मिलीभगत कर लेती है और इन पर कार्यवाही नहीं करती। कच्ची शराब का कारोबार दिनों दिन और गांवों में भी फैलता जा रहा है। बाहर से आकर डेरा जमाकर बैठे कंजर जाति के लोग बाईक के माध्यम से कट्टियों में भरकर कच्ची शराब एक स्थान से दूसरे स्थान तक बेचने के लिए सप्लाई करते हैं । चूंकि 180 एमएल सफेद का क्वार्टर 45 रूपये का होने के कारण 20 रूपये में दो कच्ची शराब की अद्दी सस्ते दामों पर मिलने के कारण लोगों के नशे का शौक पूर्ण हो जाता है वहीं पाउच की कीमत मात्र 10 रूपये होने से छोटे-छोटे बच्चे भी इसके आदि होते जा रहे हैं। 

पीपलखाड़ी में नहर की पुलिया पर सुबह 7 बजे से ही ये कारोबारी अपने फड़ सजा लेते हैं और राहगीरों को लुभाते हैं। इस मार्ग पर सुबह से ही शराबियों का मजमा लग जाता है। दूध की टंकियों एवं सब्जियों की कैरेट में छिपाकर शराब के पाउच लाते हैं सप्लाई करते हैं। कच्ची शराब के पन्नी पैक हजारों पाउच हर रोज आदिवासी बस्तियों के अंदर खपाए जाते है।

सहरिया क्रांति के बैनर तले ज्ञापन सोंपने आई महिला जानकी बाई आदिवासी एवं रामकली आदिवासी का कहना है कि जब इस अवैध कंजर शराब की बिक्री रूकवाने का थाना प्रभारी से अनुरोध किया तो वे उल्टे आदिवासी महिलाओं से दुर्व्यवहार कर बोले कि इतने बच्चे पैदा क्यों किये जो तुमसे सम्भल नहीं रहे अब पुलिस के पास कोई मंत्र नहीं है जिससे बच्चों को दारू पीने से रोक सके। आदिवासियों का कहना है कि पुलिस के स्थानीय कर्मचारी इन कंजरों के साथ मिलीभगत किये हैं जिससे अवैध शराब कारोबारियों के हौसले बुलन्द हैं।
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