प्रेम रामायण कथा का हुआ शुभारंभ, निकला चल समारोह

शिवपुरी। वाणगंगा धाम शिवपुरी पर आज से प्रेम रामायण कथा एवं विशाल संत स मेलन का आयोजन प्रारंभ हो गया है जो कि 24 फरवरी तक चलेगा। प्रेम रामायण कथा के शुभारंभ के पूर्र्व नगर के प्रमुख मार्गो से विशाल चल समारोह निकाला गया।  जिसमें स्थान-स्थान पर धर्मप्रेमियों ने चल समारोह का स्वागत कर उस में उपस्थित संतों का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। 

जिसमें चित्रकूट, अयोध्या, मथुरा वृन्दावन,काशी, गंगा सागर, इलाहबाद, गया, करहआश्रम से मंहत शामिल हुए हैं। आज शहर में जगह-जगह संतों का शहर के नागरिकों ने जोशीला स्वागत किया। भगवान सहस्त्रबाहू अर्जुन चौराहे पर समाजसेवी डॉ. रामकुमार शिवहरे ने समारोह में मौजूद मंहत नारायण दास जी महाराज एवं जगतगुरू रामानंदाचार्य, बल्लभाचार्य महाराज का माल्यार्र्पण कर स्वागत किया एवं उनसे आशीर्र्वाद ग्रहण किया। चल समारोह में बड़ी सं या में श्रद्धालु मौजूद थे। 

प्रेम रामायण कथा का चल समारोह आज सुबह विष्णुु मंदिर से प्रारंभ हुआ और नगर के प्रमुख मार्र्गो से चल समारोह गुजरा। स्थान-स्थान पर धर्माबल िब स्वागत के लिए उपस्थित थे। कथा 15 फरवरी से 23 फरवरी तक दोपहर 1 से 5 बजे तक होगी। कथा महंत नारायण दास महाराज के सानिध्य में एवं जगतगुरू रामानंदाचार्य, बल्लभाचार्र्य महाराज के श्रीमुख से सुनार्ई जाएगी। स्वागत करने वालों में वाणगंगा ट्रस्ट के द्वारा अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल, सचिव बलराम यादव, उपाध्यक्ष मदन गोयल, सदस्य राजेश बंसल मसाले वाले, राधे कुशवाह, भीमसेन, अतर सिंह सड़ वाले, पीयूष यादव, नीतेश, सीटू यादव आदि लोगों के  साथ हजारों नागरिकों की  सराहनीय भूमिका रही। 

जिन देवी देवताओं को पूजते हैं उनका चित्र न छपवायें
चल समारोह में पर्र्चे भी वितरित किए जा रहे थे जिसमें अनुरोध किया जा रहा था कि शादी विवाह, धार्र्मिक अनुष्ठान आदि की निमंत्रण पत्रिका और समाचार पत्रों में अपने ईष्ट देवता के चित्र प्रकाशित न किए जायें। क्योंकि वे समाचार पत्र एवं पत्रिकायें कूड़ेदान तथा कचरे के ढेर पर सडक़ों में पैरों पर डली हुई दिखाई देती है। जिससे हमारे देवी देवताओं का घोर अपमान होता है। इससे बड़ी शर्र्म की बात हमारे लिए और क्या हो सकती है कि जिन देवी देवताओं के फोटो की पूजा होनी चाहिए वह हमारे पैरों अथवा कचरे में ढेर में दिखाई देते हैं।
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