Wednesday, February 08, 2017

प्रभारी कलेक्टर की धमकियों से जनसुनवाई में जनता ने बनाई दूरी: अमला भी परेशान

शिवपुरी। मप्र के मुखिया ने जनसुनवाई कार्यक्रम इस कारण शुरू किया गया था कि पीडि़त व्यक्ति का तत्काल न्याय मिल सके। इसी कारण पूरा का पूरा प्रशासनिक अमला एक ही स्थान पर बैठ कर जन समस्या का तत्काल निराकरण करेगां, परन्तु प्रभारी कलेक्टर के द्वारा आवेदको को बार-बार दी जा रही धमकी के कारण जनता अब इस कार्यक्रम से दूरी बना रही है। इतना ही नही  अधिकारियों को भी जिस अंदाज में सार्वजनिक तौर पर जलील किया जा रहा है वह भी कितना उचित है यह भी समझ से परे है।  

तात्कालिन कलेक्टर राजीव दुबे ने जनसुनवाई कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कुछ बदलाव करते हुए यह तय किया कि प्रति मंगलवार जिला कलेक्ट्रेट में सभी शासकीय कार्यालयों की एक साथ जनसुनवाई होगी और यहां कलेक्टर एवं उनके अधीनस्थ अधिकारी बैठकर आने वाली शिकायतों का निराकरण एवं आवश्यक निर्देश जारी करेंगे। 

लंबे समय तक यह सब ठीक चलता रहा। राजीव दुबे के शिवपुरी से स्थानांतरित होने के बाद शिवपुरी आए कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने भी इस जनसुनवाई को और भी प्रभावी बनाने के लिए कई आवश्यक कदम उठाए जिसके चलते शिवपुरी में यह जनसुनवाई जनता की समस्याओं के निराकरण का पर्याय बन गई लेकिन 13 जनवरी से कलेक्टर के 45 दिन के लिए प्रशिक्षण पर जाने के बाद उनका प्रभार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिपं के पद पर पदस्थ नेहा सिंह मारव्या को मिला। 

यहीं से जनसुनवाई न सिर्फ विवादों में घिरती गईए बल्कि जनता एवं अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब भी बन गई। सर्वप्रथम प्रभारी कलेक्टर ने इस जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मीडिया को रोकने की नीयत से कुछ कदम उठाए जिसे आंशिक संशोधन के साथ लागू कर दिया गया। 

इसके अलावा अपनी पहली ही जनसुनवाई में प्रभारी कलेक्टर ने राशन न मिलने की शिकायत लेकर आईं महिलाओं को  यह कहते हुए बाहर जाने के निर्देश दे दिए कि यदि नहीं मानोगी तो जेल में डलवा देंगे। गरीब बेसहारा महिलाएं क्या करतीं वे न सिर्फ बाहर हो गईंए बल्कि गिर तारी के डर से अपने-अपने घर भी चलीं गईं। 

इतना ही नहीं मंगलवार को हुई जनसुनवाई में ऐसा ही एक नजारा उस समय देखने में आया जब रोजगार सहायक की शिकायत लेकर पोहरी के ग्राम पंचायत ककरई की महिला सरपंच शांति यादव को प्रभारी कलेक्टर ने धारा 40 की कार्यवाही की जद में लेने की धमकी दे डाली। महिला सरपंच का दोष बस इतना था कि उसने प्रभारी कलेक्टर से यह कह दिया कि वो आपसे पहले अपने पति के साथ जाकर सीईओ साहब से भी शिकायत कर चुकी हैं। 

प्रभारी कलेक्टर के तेवर देखकर महिला सरपंच खुद की बचाव की मुद्रा में आ गई। कुल मिलाकर जनसुनवाई में जिस तरह आवेदकों को धमकाने का क्रम चल रहा है उससे तो ऐसा लगता है कि अब जल्द ही आमजन शासन के इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई कार्यक्रम से दूरी बना लेंगे।