जहर भरी पंगत: दुल्हन कोटा रैफर, कई मरीज दिल्ली में, कलेक्टर मेडम की एनओसी चर्चा में

शिवपुरी। विगत 5 फरवरी को बैराड़ में एक शादी समारोह में खाना खाने के बाद 4 सैकड़ा से अधिक लोगों ने अस्पताल के बिस्तर पकड लिए। बताया जा रहा है कि इस जहरीली पंगत में दूध में ऐसा क्या मिला था कि डॉक्टर पकड नही पा रहे और इस कारण बीमारों का इलाज नही हो पा रहा है। इस मामले में तेज तर्रार प्रभारी कलेक्टर का चुप बैठना भी अपने आप में एक खबर है। क्यों अभी तक कलेक्टर मेड़म ने खाद्य विभाग पर कार्रवाई नही की। क्या अब प्रभारी कलेक्टर को अपने अधिकार और कर्तव्य याद नहीं आ रहे। या फिर मामला मलाई का है। 

उल्लेखनीय है कि 5 फरवरी को बैराड़ में आयोजित एक शादी समारोह था। जिसमें सैकड़ों लोगों ने भोजन किया। भोजन के पांच से दस घंटे बाद लोग उल्टी एवं दस्त के साथ बुखार ने अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया था। बड़ी संख्या में बीमारी से ग्रस्त हुए लोगों का उप स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय एवं निजी चिकित्सालयों में भर्ती होना शुरू हो गया था। 

बताया गया है कि जिस घर में शादी समारोह था। उसके परिवान में भी बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी को इस बीमारी ने घेर लिया। विभिन्न चिकित्सालय में स्वास्थ्य लाभ ले रहे मरीजों को सात दिन बाद भी आराम नहीं मिला। स्वयं की शादी में भोजन के बाद बीमार हुई दुल्हन को पहले उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था, यहां लाभ न मिलने के बाद शिवपुरी के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया यहां भी स्वास्थ्य लाभ न मिलने के बाद उसे उपचार हेतु कोटा के लिए रैफर कर दिया गया है।   

वहीं ग्वालियर में दर्जनों लोग सरकारी और निजी चिकित्सालयों में भर्ती है। शिवपुरी में भी एक सैकड़ा से अधिक मरीज जिला चिकित्सालय एवं निजी चिकित्सालय में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, लेकिन सात दिन गुजर जाने के बाद भी पूर्ण रूप से लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया गया है कि गंभीर हालत में कुछ लोगों को ग्वालियर से दिल्ली भी भेज दिया गया है।

रिश्वत लेकर सोता है खाद्य विभाग
इतने बडी जहरीली पंगत कांड के बाद भी खाद्य विभाग के अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नही की है। बल्कि मीडिया के जबावों से बचने के लिए अपने फोन भी बंद कर रखे है। बताया जा रहा है कि बैराड़ मे नकली दूध का निर्माण किया जा रहा है। और इसी दूध के दहीबडे बने थे। इन दहीबडो को ही खाकर पूरी पंगत बीमार हुई है। 

इस मामले में अपने राम का कहना है कि इस मामले में खाद्य विभाग का अभी तक चुप बैठना एक गंभीर लापहवाही उजागर होती है। अधिकारियों ने अपना महिना बांधकर जहर बेचने के लाईसैंस दिए है, अब खाद्य विभाग इन जहरीले दूध की कारोबारियों की हिफाजत कर रहा है। लेकिन इससे भी बडी बात की तेज तर्रार प्रभारी कलेक्टर ने खाद्य विभाग को इस मामले में एनओसी क्यो दे रखी है यह समझ से परे है। 

बीमारी के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पा रहा: डॉ सिंह
भोजन करने के बाद बीमार हुए कुछ मरीज पोहरी रोड़ स्थित एम.एम हॉस्पीटल में अपना उपचार करा रहे हैं। हॉस्पीटल के संचालक डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि तमाम जांचों के बाद भी वह यह निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे कि भोजन में ऐसा क्या पदार्थ मिला था जिसकी बजह से लोग बीमार हुए हैं। 

इस बीमारी के लिए कौन सी दवा दी जाए जिससे वह उल्टी दस्त एवं पेट में हो रही मरोड़ से मरीजों को राहत दिला सकें, हालांकि उन्होंने अल-अलग दवाओं का प्रयोग करते हुए कुछ मरीजों का उपचार कर स्वास्थ्य लाभ देकर उनकी छुट्टी कर दी गई थी। लेकिन पुन: बीमार होकर कुछ मरीज वापस लौटकर आए हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। 
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