सालो से नही खुली कोलारस में आंगनवाड़िया, किसी की नियुक्ति कोई कर रहा है संचालन

कोलारस। महिला बाल विकास के द्वारा संचालित आंगनबाडी कुपोषण से लडने के लिए एक अस्त्र है। परन्तु अधिकाारियों की लापरवाही होने के कारण कोलारस में कई आंगनबाडिय़ा वर्षो से नही खुलने की खबर आ रही है। 

कोलारस अनुविभाग के ग्राम गणेश खेडा में संचालित आंगनवाडी केन्द्र पर पदस्थ सहायिका का विवाह पांच वर्ष पूर्व हो चुका है वह कभी आंनगबाडी केन्द्र पर नजर नहीं आती है हमारे द्वारा अनेको बार सीएम हेल्प लाईन पर शिकायत की गई है लेकिन आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। 

जब भी शिकायत की जाती है तो उसके बाद क ाी कबा उसके परिजन आंगनबाडी ाोल कर उसका संचालन करने लगते है। और वहीं अनुवि ााग के ााटी, नेतवास, किलावनी, बूड़ीराई, राई, डोंगरपुर, रामपुर सहित अनेक आंगनबाडिय़ां इस समय वीरान सी नजर आ रही हैं। 

सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का ला ा वहां के बच्चों से लेकर र्ग ावती माताओं को इन आंगनबाडिय़ों से नहीं मिल पा रहा है। कोलारस अनुवि ााग की ही ग्राम डेहरवारा चिलावद से लेकर अनेक आंगनबाडिय़ों में कागजी कार्यवाही कर फर्जी तरीके से शासन का बजट ठिकाने लगाया जा रहा है। इन आंगनबाडिय़ों में न तो गोद ाराई पोषण आहार से लेकर एक ाी योजना इन ग्राम के लोगों को नहीं दी गई। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से प्रतिमाह सेक्टर सुपरवाइजर द्वारा वसूली यहां पर चर्चा का केन्द्र बनी हुई है। कोलारस नगरीय क्षेत्र में ाी एक से लेकर पन्द्रह वार्डों में आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति अच्छी नहीं है। इनका न तो ाुलने का समय है और न ही बंद होने का समय।  

आज तक महिला बाल विकास वि ााग की मंत्री द्वारा कोलारस ग्रामीण अंचलों की आंगनबाडिय़ों का दौरा तक नहीं किया गया। शासन अनेक योजनाओं को बनाकर इन आंगनबाडिय़ों में ोज रही है परन्तु शासन के ही कर्मचारियों की मनमानी के चलते योजनाओं का ला ा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अनेक आंगनबाडिय़ों में तो कार्यकर्ता तक नहीं रहतीं। 

इसके बाद ाी इनको प्रतिमाह शासन द्वारा वेतन दिया जा रहा है। कोलारस अनुवि ााग में अनेक ऐसी आंगनबाडिय़ां संचालित हैं जिनका पता तक ग्रामीणजनों को नहीं है। बजट के अ ााव में आज ाी कोलारस से लेकर ग्रामीण अंचलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के घरों पर आंगनबाडिय़ां संचालित हो रही हैं। 

ग्रामीण अंचलों से लेकर कोलारस नगर में संचालित आंगनबाडिय़ों पर नजर दौड़ाई जाये तो इनमें बच्चों की उपस्थिति उतनी नहीं होती जितनी कार्यकर्ताओं द्वारा रजिस्टर में दर्शायी जा रही है। 

इस बात से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कोलारस से लेकर ग्रामीण अंचलों की आंगनबाडिय़ों में कितनी मनमानियां हावी हो चुकी हैं। जिले की महिला बाल विकास अधिकारी अचानक आकर निरीक्षण करें तो अनेक कार्यकर्ताओं से लेकर सहायिकाओं पर गाज गिर सकती है।
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