Saturday, February 11, 2017

अवैध उत्खनन का कलंक: हथियारों के साए में सफेद पत्थर का काला कारोबार

इमरान अली/विकास कुशवाह/कोलारस। अवैध उत्खनन इस नाम और काम से जिलेवासी बखूवी वाकिफ हो चुके है। आए दिन जिले भर में कोई न कोई अवैध उत्खनन की खबर अखबारों की शोभा बड़ा रही है। और प्राकृतिक संसाधनो की लूट मची हुई है। प्रदेश कि मंत्री और जिले की विधायक श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया के तल्ख लहजे के बाद भी हालात जस के तस बने हुए है। अवैध उत्खनन पर प्रशासन कितना स त है। यह तो सरकारी आंकड़े और मौके पर किये गए अवैध कार्यो जब मेल मिलाया जाए तो सरकारी आंकडो की पार्दशिता कागजो से साफ जलकने लगेगी। 

बात अगर कार्यवाही की करे तो कार्यवाही के नाम पर अधिकारी सिर्फ सेंकड़ो में से एक दो वाहनो को पकडक़र अधिकारी अपनी पीठ थपथाने लग जाते है। लेकिन अवैध उत्खनन का कलंक धीरे धीरे जिले के नाम में जोड़ा जाने लगा है। इसलिए युं कहना भी गलत नही होगा की शिवपुरी जिला अवैध उत्खनन में प्रदेश स्तर तक अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। 

लेकिन आज बात कुछ अलग है। आज हम बात कर रहे है। कोलारस विधानसभा की जहां सिंध से बजरी का अवैध उत्खनन आम हो गया है। ओर अधिकारियो को इनहे रोकना एक बड़ी चुनौती लगने लगा है। अपनी शाख बचाने के लिए अधिकारी दबाब में महीनो में एक आद कार्यवाही कर अपनी तो बचा लेते है। लेकिन पुर्णता रोक ही लगा पाते। लेकिन आज हम बात सिंध से निकाली गई रेत की नही बल्कि सफेद सोने की कर रहे है। 

हमारे प्रतिनिधी ने कोलारस से करीब 50 किमी दूर रन्नौद और टीला के जंगलो की खाक छानते हुए एक ऐसी जगह का पता किया जहां से धरती का सीना चीर कर हथियारो के साये में सफेद पत्थर निकाल कर उसका काला कारोबार वर्षो से किया जा रहा है। अवैध पत्थर की खुदाई करीब 20 किमी के एरीये में फैला हुआ है। जिसमें पहाड़ के चारो और अवैध उत्खनन के दर्जनो गडडे उत्खनन की कहानी वयां कर रहे है। यहां से पत्थरो के लेंटर, दासे बड़े बड़े पाट और निकाले जाते है। इस जगह को पाटखो नाम से भी जाना जाता है। यह कारोबार पंजाब के पठानकोट की तर्ज पर किया जा रहा हैै। जिसकी सप्लाई जिले के कौने कौने में की जाती है। 

हमारी टीम ने आस पास रहने वाले गरीब मजदूरो से ज्यादा जानकारी लेनी चाही तो उन्होने दबी जुबान से कहना है। की इस अवैध उत्खनन में कई जमीनी स्तर के अफसर भी लिप्त है। जो इस काले कारोबार में साथ देने के लिए हफते भर में एक मोटी रकम उत्खनन करने वालो से लेते है। जिससे यह प्रतीत होता है। की इन अवैध उत्खननकारियो को रोकने की जगह गुंडा टैक्स भी बसूला जाता है। यह एक ताज्जूब की बात है। इस पूरे मामले में एक पेंच और सामने आया है। 

जिस जगह पर सफेद पत्थर वर्षो से निकाला जाता है। वह वन विभाग में कोलारस, विकासखण्ड में बदरवास और थाना क्षेत्र में रन्नौद में शामिल है। मामला साफ है। बिना मिली भगत के तो जंगल से एक कंकड़ भी चोरी नही किया जा सकता है। क्युं की हर मीटिंग में क्षेत्रिय प्रभारी अपने दामन को पाक साफ बताने से भी नही चूगते लेकिन इतने बडे स्तर पर पत्थरो का उत्खनन तो दूसरी कहानी वयां कर रहा है। 

दिग्गजो के क्षेत्र में अवैध उत्खनन खामोशी पर कई सवाल -
साथ ही कोलारस विधायक रामसिंह यादव, जिलापंचायत अध्यक्ष कमला बैजनाथ सिंह यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष सुषील रघुवंशी भी इसी क्षेत्र के रहनुमा माने जाते है। लेकिन आज तक किसी ने इस अवैध कार्य को रोकने की जहमत नही उठा पाई। इस पूरे खनन में सबसे ज्यादा सवाल क्षेत्रिय कांग्रेेस निशाने पर है। भले ही केन्द्र और प्रदेश में कांग्रेस काबिज नही है। लेकिन जिले में कांग्रेस मजबुती से टिकी हुई है। जमीं से जुड़े हुए और दिग्ग्ज नेता सबसे अधिक कोलारस विधानसभा की देन है। लेकिन शायद वह अपनी विपक्षिय भूमिका से डरे हुए दिख रहे है। ओर कोई अवैध गतिविधियो पर आवाज उठाने को तैयार नही।