यमराज प्राईवेट लिमिटेड में हुआ 2 विभागों का विलय, किस्सा झोलाछापों से वसूली का

ललित मुदगल @बात मन की/शिवपुरी। हमारे पुराणो के अनुसार इस संसार की व्यवस्था संचालित करने के लिए विधाता ने सभी देवी देवताओ को अपने-अपने विभाग सौंपे है। ज्ञान के लिए सरस्वती जी, बुद्धि के श्रीगणेश जी, धन के लिए कुबेर और लक्ष्मी मैया, वर्षा करने के लिए इंन्द्र और प्राणवायु के लिए पवनदेव, सूर्यदेव का उजाले व शीतलता के लिए चन्द्रदेव। इस संसार के पालन हार भगवान विष्णु को मना गया है और संहार के लिए भगवान शिव को, मुत्यु का देवता यमराज को मना जाता है।

पहले आकाशवाणी भगवान करते थे, लेकिन अब भारत सरकार का आकाशवाणी केन्द्र करता है और इस कलयुग में यमराज का रोल प्ले कर रहे है हमारे सीएमएचओ और यमदूतों का काम शिवपुरी जिले के झोलाछाप डॉक्टरों ने संभाल रखा है।

कुल मिलाकर शिवपुरी में यमराज एण्ड प्राईवेट लिमिटेड है, लोगो की जान लेने के लिए है। लेकिन इसमें और कई विभागो के विलय होने की भी खबरे आने लगी है। पहलें हम मूल खबर की ओर चलते है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बिना डिग्री वाले डॉक्टर प्रेक्टिस नही कर सकते, इन्हे झोलाछाप डॉक्टरो की श्रेणी में रखा गया है, इन पर कार्यवाही करने के आदेश कई बार सुप्रीम कोर्ट कर चुका है।

शिवपुरी प्रशासन ने कई बार कार्रवाई की है लेकिन दिखाने भर की। जिले में सबसे ज्यादा कोलारस में झोलाछाप डॉक्टरों का आंतक है। प्रशासन ने इन पर कार्यवाही करने के लिए तहसील स्तर पर बीमएओ, एसडीएम और पुलिस की संयुक्त टीमे गठित की थी लेकिन कोलारस में कैसी कार्रवाई हुई यह हम बताते हैं।

दो वर्ष पूर्व कोलारस नगर के एप्रोच रोड इलाके में संचालित धाकड क्लीनिक पर लोगों का उपचार करने वाले झोलाछाप मोहनलाल धाकड के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग व पुलिस विभाग आदि सयुक्त टीम ने छापामारी की थी। इस दौरान झोलाछाप मोहनलाल धाकड तो भाग निकला परंतु उसके दवाखाने में प्रशासनिक टीम को लंबी तादात में एक्सपायरी दवाओं का जखीरा व बिना अनुमति पैथलॉजी व मेडीसन आदि संचालित होते हुए मिले थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने धाकड क्लीनिक को सील कर कोलारस कोतवाली में इनके खिलाफ मामला दर्ज भी किया था लेकिन अब इस झोलाछाप डॉक्टर ने एक छोटी सी क्लीनिक को बंद कर पूरा अस्पताल खोल लिया है किसी दूसरे एमबीबीएस डॉॅक्टर की डिग्री लगाकर। बताया यह भी गया है कि डिग्री तो दूसरे डॉक्टर की है परंतु इलाज यही डॉक्टर करता है।

दो वर्ष पहले पुराने थाने के सामने संचालित चांदसी क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामारी की थी। उस दौरान टीम को देखकर झोलाछाप रज्जन अधिकारी भाग खडा हुआ था, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने झोलाछाप का दवाखाना शील्ड कर उसे आपात्र करार देते हुए चांदसी क्लीनिक को सील कर दिया था। सील किए जाने के 24 घटें बाद यह दवाखाना खुल गया। सील करने वाले अधिकारियों ने इस डॉक्टर को 24 घटें में एमबीएस की डिग्री प्रदान कर दी।

चार माह पहले जगतपुर इलाके में स्थित झोलाछाप गणेश धाकड को आपात्र मानकर उसके धाकड क्लीनिक को शील्ड कर दिया था। लेकिन अगले चौबीस घंटे बाद झोलाछाप गणेश धाकड को भी एमबीबीएस की डिग्री मिल गई अब उसकी दुकान भी खुल गई।

कहने का मतलब सीधा है, कि पहले तो केवल स्वास्थय विभाग सीधे-सीधे इस कारनामे के लिए दोषी था लेकिन अब राजस्व के अधिकारी भी इस वसूली के खेल में शामिल हो गए है। क्योंकि यह सभी दुकाने राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई थी।

झोलाछाप डॉक्टरो पर कार्रवाई करने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम और बीएमओ को नियुक्त किया है लेकिन इन दोनों अधिकारियों को अपनी कार्रवाही ही नही दिखती है, दूसरा सिर्फ यही डॉक्टर ही नही है इस क्षेत्र में इसके आलावा भी एक सैकडा झोलछाप डाक्टर अपनी दुकान सजाकर बैठे है।

इस मामले में अपने राम का यह कहना है कि इस पूरे मामले में वसूली का खेल है,प्रत्येक झोला छाप डॉक्टर से वसूली प्रत्येक माह होती है जब ऊपर से प्रशासन का प्रेशर आता है तो दिखाने के लिए कार्रवाही हो जाती है। जब अधिकारियों से पूछो तो कि दुकान कैसे खुल गई तो एक दूसरे पर टाल दिया जाता है।
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