नपा टेंडर काण्ड: 20 हजार रू प्रति गाड़ी तय हुआ नपाध्यक्ष और सीएमओ को

शिवपुरी। नपा का एक टेंडर काण्ड शिवपुरी की फिजाओ में गूंज रहा है। इस काण्ड में सिंघई मोटर्स के संचालक का कहना है कि हमारा टेंडर नपा ने नियम विरूद्व तरिके से इस कारण रद्द कर दिया है कि हमने रिश्वत की डील उनके हिसाब से तय नही की। 

जब नपा ने सिंघई मोटर्स भोपाल को टेंडर रद्द कर दिया तो सिंघल मोटर्स जो टाटा की गाडिय़ा बेचते है उनके प्रबंधक दुबे ने एक ऐसा ऑडिय़ो वायरल कर दिया जिसमें नपा के एक कर्मचारी और उनकी बातचीत है इसमें यह कर्मचारी रिश्वत की मांग कर डील करने सेट कर रहा है। 

जैसा कि विदित है कि इन दिनो स्वच्छता अभियान चल रहा है ओर इसके लिए गाडिय़ो के खरीद के लिए टेंडर कॉल किए गए थे। यह टेंडर नपा ने 28 जनवरी को नगर में 10 कचरा वाहन सप्लाई करने के लिए टेंडर लगाए थे। इसके बाद 4 फरवरी को टेंडर ओपन कर दिए गए। 

लेकिन सिंघई मोटर्स का टेंडर सिर्फ  इसलिए नहीं खोला क्यों कि उनके द्वारा 27 हजार रुपए प्रति वाहन कमीशन देने से इंकार कर दिया गया। नपा ने यह कहकर टेंडर नहीं खोला कि आपकी कंपनी के द्वारा ईएमडी की राशि जमा नहीं की गई है। जबकि 1 लाख 28623 रुपए की ईएमडी राशि कंपनी के द्वारा ऑनलाइन ही जमा करा दी गई थी। 

इसी बात से दुखी होकर सिंघई मोटर्स भोपाल के प्रबंधक अशोक दुबे ने एक ऑडियो वायरल कर दिया। अशोक दुबे के अनुसार यह बातचीत नगर पालिका शिवपुरी के इस्पेक्टर राघवेन्द्र दुबे है। इस ऑडियो में स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहा है, जिसमे नगर पालिका शिवपुरी के इस्पेक्टर राघवेन्द्र दुबे गाडियों के पेमेन्ट में रिश्वत की मांग कर रहे है। 

इस पूरे मामले में यह निकलकर आया है कि इस टेंडर को इस कारण निरस्त किया गया है कि पिछले समय में जब सिंघई मोटर्स ने गाडिय़ो की सप्लाई की थी तब रिश्वत का लेनदेन वायदे के अनुसार नही किया। इसी कारण इस टेंडर को निरस्त किया गया। 

इस पूरे ऑडियो में सबसे बडी बात यह निकल कर आई है कि सिंघई मोटर्स ने पिछली गाडिय़ा जब नपा शिवपुरी में सप्लाई की थी तो इस ऑडियो के मुताबिक नपाध्यक्ष और सीएमओ को 20 हजार रूपए गाडी का तय हुआ था। इसी बातचीत  से भरे ऑडियो को अशोक शर्मा ने वायरल किया है। और यह ऑडियो मई 2016 का है। 

कुल मिलाकर इस ऑडियो में लेनदेन कितना और किसको किया गया है यह तो भगवान जाने लेकिन अशोक शर्मा का पुराना बिल जब ही चूकता किया गया होगा जब सभी तय शुदा रिश्वत दी गई होगी। इस ऑडियो के वायरल से और नपाध्यक्ष और सीएमओ के नाम आने से फिर शिवपुरी एक और बार शर्मिदां हो गया। पहले भी जब शर्मिदां हो गया था जब पूर्व नपाध्यक्ष रिशिका अष्ठाना को अपने कार्यकाल के एक दिन पूर्व ही भ्रष्टाचार के मामले में राज्य शासन ने हटा दिया था। 
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