Thursday, January 19, 2017

बुरी खबर: शहर की सड़कों के निर्माण का टेंडर फिर अटका, करना होगा इंतजार

शिवपुरी। वर्ष बदल गया है परन्तु शिवपुरी के ग्रहदशा अभी भी नही बदले। शिवपुरी में सड़कों के निर्माण में लगातार बाधायें उत्पन्न हो रहीं है। 3 करोड़ 60 लाख रूपए की शहर की पांच सड़कों का निर्माण पुन: लटक गया है। 

पहले सड़कों के निर्माण हेतु 13 प्रतिशत बिलो का टेंडर जिस फर्म को स्वीकृत किया गया था। उसके द्वारा काम शुरू न करने पर परिषद ने उसका वर्क ऑर्डर निरस्त कर पुन: टेंडर लगाए थे,जिनमें 8 प्रतिशत एवं दर पर मे.राजलक्ष्मी कंस्ट्रेक्शन का टेंडर स्वीकृत हुआ था लेकिन उसे वर्क ऑर्डर देने में राज्य शासन ने इन्कार कर दिया है। 

सूत्रों के अनुसार इन्कार करने का कारण यह है कि पहले टेंडर और दूसरे टेंडर की दरों में 75 लाख रूपए से अधिक राशि का अंतर है और दूसरे टेंडर में नगर पालिका को 75 लाख का अधिक भुगतान करना होगा। राज्य शासन ने इस आधार पर भी वर्क ऑर्डर देने से इन्कार किया क्योंकि परिषद को एक करोड़ रूपए से अधिक की राशि का टेंडर निरस्त करने का अधिकार नहीं है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीवेज प्रोजेक्ट की खुदार्ई के कारण शहर की लगभग सभी सडक़ें जीर्णशीर्ण हो गई है। राज्य शासन ने कोर्ट रोड़, वायपास से स्टेशन रोड़, महल के पीछे से आशीर्वाद हॉस्पीटल तक, देवेन्द्र जैन से एम.एम. हॉस्पीटल तक, नाली निर्माण मिर्ची मार्केट से एबी रोड़ निर्माण हेतु तीन करोड़ 60 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की। 

स्वीकृति के पश्चात जब टेंडर निकाले गए तो मे. अर्पित शर्मा ने रोड़ निर्माण हेतु 13 प्रतिशत बिलो दर डाली। लेकिन दर स्वीकृति के बाद ठेकेदार ने अनुबंध नहीं किया और बिलोदर के हिसाब से 24 लाख रूपए की राशि जमा नहीं की तो पीआईसी ने टेंडर निरस्त कर दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी।

नियमानुसार पीआर्ईसी को एक करोड़ रूपए की राशि के टेंडर स्वीकृत और निरस्त करने के अधिकार हैं। एक करोड़ रूपए की राशि के टेंडर निरस्त करने के लिए उसे राज्य शासन को अनुशंसा कर भेजनी होती है। राज्य शासन टेंडर निरस्त करने के बारे में निर्णय लेता है।

 नियमानुसार इस मामले में परिषद को 13 प्रतिशत बिलो रेट डालने वाले ठेकेदार को अनुबंध करने के लिए नोटिस जारी करना चाहिए था जो कि उसने नहीं किया और सीधे-सीधे टेंडर निरस्त कर दिया और पुन: टेंडर आमंत्रित कर दिए। इसमें जिस ठेकेदार के कम रेट थे उसने एसओआर से आठ प्रतिशत अधिक दर डाली थी।  

जब यह प्रस्ताव शासन स्तर पर तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए भोपाल भेजा गया तो शासन ने सडक़ों के निर्माण हेतु पुन: टेंडर प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया। वहीं यह भी खबर है कि प्रथम टेंडर लेने वाले ठेकेदार अर्पित शर्मा ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली है वहां से क्या निर्णय आया है यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। लेकिन राज्य शासन के आदेश से सडक़ों का निर्माण एक बार फिर से लटक गया है।