ड्रग्स का जंगल राज: कलेक्टर के मुहं फेरते ही रिश्वत का खेल शुरू

शिवपुरी। बात सीधी-सीधी करते है जिस ड्रग्स के जंगल राज के खात्मे के लिए कलेक्टर शिवपुरी ने कमर कसी थी और इस मामले में लापरवाही बरतने वाले डीआई को सस्पैंड कर दिया था। लेकिन कलेक्टर शिवुपरी के विदेश दौरे पर जाने के बाद यह ड्रग्स का जंगल राज फिर कायम हो गया। इसमे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारो द्वारा जमकर उगाही करने की खबर आ रही है। 

ड्रग्स के जंगल राज के खात्मे के लिए कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने सीएमएचओ खरे के माध्यम से कार्यवाही का श्री गणेश कराया था। कलेक्टर ने निर्देश दिए थे कि सभी एसडीएम अपने अनुविभाग में सभी मेडिक़ल स्टोरो को चैक करे व प्रभावी कार्यवाही करे। 

सीएमएचओ के नेतृत्व में जिस टीम ने जिले के आठ में से छह मोडिकल स्टोर्स पर छापामारी के दौरान नार्कोटि1स ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित दवायें पकड़ीं उन दुकानों के विरुद्घ आज तक कोई कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया। 

क्या मेडिकल स्टोर्स पर प्रतिबंधित दवायें बिकना कानूनन सही है। यदि सही है तो सीएमएचओ ने उन्हें जब्ती में क्यों लिया और यदि विक्रय गलत है तो ड्रग एक्ट के तहत अब तक इनमें से किसी भी मेडिकल स्टोर के खिलाफ न तो लायसेंस निरस्ती की कार्यवाही की गई और न एफआईआर दर्ज कराई गई। 

इस पूरे मामले में अपने राम को तो यही कहना है कि झोलाछाप डॉक्टरों से महिना उगाने वाले विभाग को कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने महीना वसूलने का एक ओर ग्राउंड दे दिया है। भले ही कलेक्टर शिवपुरी विदेश दौरे पर हो पर उनके आदेश और मेडिकल स्टोरों के रिकार्ड तो शिवपुरी में ही है। फिर इन रिकार्डो को क्यों नही खंगाला जा रहा है। इस मामले में कार्यवाही के नाम सिर्फ प्रेस नोट ही प्रकाशित कराए जा रहे है। अभी तक जिले की किसी भी दुकान पर यह लिखा नही गया कि यह दुकान थोक दवा की है खेरिज की है। 

न ही वह सूची प्रकाशन के लिए भेजी गई जो यह कहे की कौनसी दुकान थोक की है और कौनसी मेडिकल खेरिज की है। पूरे मामले को दबाने का प्रसास किया जा रहा है। ऐसे में फिर अपने राम का कहना है कि प्रभारी कले1टर इस मामले को अपने संज्ञान में ले और कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव की मंशा के अनुरूप ड्रग्स के इस जगल राज को खत्म करे। 

जिले को नही मिले नए ड्रग इस्पेक्टर
कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने जिले के लिए 2 नए ड्रग्स इंस्पेक्टरों की मांग की थी लेकिन उनकी यह मांग अभी तक नही पूरी हो गई है। हम पाठकों को जानकारी के लिए लिख रहे है कि शिवुपरी की मेडिकल ऐसोशियन शक्तिशाली ऐसोशियन है। इस ऐसोशियन पर धन और बल की कोई कमी नही है। यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि जिले में नए ड्रग इस्पेंक्टरो की आमद में कही इस ऐसोशियन का भोपाल स्तर पर खेल तो नही है। 
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