84 के दंगों का दर्द: अपना हक मांगते-मांगते 1 पीढी गुजर चुकी है

शिवपुरी। सन 84 के दंगों का दर्द फिर बहार आ रहा है। पीडि़त परिवारो को आज तक मुआवजा नही नही मिला है। पीडि़त परिवारो ने कहा कि हम बीते 32 साल से अनुग्रह राशि के लिए भटक रहे हैं। सरकार ने कई चरणों में अनुग्रह राशि को कई गुना बढ़ा दिया लेकिन आज दिनांक तक यह राशि नहीं मिली है। 

सन 84 में हुए दंगों के दौराने हमारे घर और दुकानों को दंगाइयोंं द्वारा क्षति पहुंचाई थी। जिसके एवज में कोर्ट और शासन द्वारा स्वीकार किए जाने के बावजूद आज दिनांक तक सहायता के लिए हम 23 सिख परिवार भटक रहे हैं।

खास बात यह है कि इन्होंने कलेक्टर से लेकर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में कई बार आवेदन दिए पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। सिख समाज के महेंद्र सिंह अरोरा,रंजीत सिंह, चरणजीत सिंह,गुरुदेव सिंह, गुरचरण सिंह, मंजीत कौर आदि ने शिकायत करते हुए कहा कि 1984 में हमलावरों द्वारा 70-80 सिख परिवारों के घर दुकान जलाए थे और लूटपाट की थी। 

जसके एवज में उन्हें 15 दिन बाद 2 हजार रुपए प्रति परिवार सहायता राशि स्वीकृत हुई। यह राशि सरकार ने सन 2006 में 18 हजार रुपए कर दी। इसके बाद 24 जनवरी 2006 को हाई कोर्ट से आए आदेश के बाद क्षतिपूर्ति राशि में 40 फीसदी का इजाफा और 6 फीसदी ब्याज की राशि बढाकर देने के निर्देश कलेक्टर को दिए गए। 

इसमें से सिर्फ 15 लाख 95 हजार रुपए की राशि 11 सिख परिवारों को ही दी गई। जबकि 23 केस की राशि 10 नवंबर 2015 को शासन द्वारा स्वीकृत की गई। बावजूद इसके भुगतान नहीं हुआ। पीडि़त परिवारो का कहना है कि हमे अपना हक मांगते-मांगते एक पीढी गुजर चुकी है। लेकिन अभी तक हमारी सुनवाई नही हुई है। 
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