हमें गर्व है शिवपुरी की इन बेटियो पर: एक सिविल जज, दूसरी ADPO और तीसरी बनी जनपद CEO

शिवपुरी। शिवपुरी की गोविन्दनगर कॉलोनी में रहने वाले पंजाब नेशनल बैंक से सेवानिवृत्त विपिन शर्मा और न्यायालय की सेवा से निवृत्त हुईं स्नेहलता शर्मा का उदाहरण उन लोगों के लिए प्रेरणास्पद है जो परिवार में बेटी होने पर चिंतातुर हो बैठते हैं। बेटियां बेटों से बढक़र होती हैं यह विपिन शर्मा और उनकी धर्मपत्नी स्नेहलता शर्मा से बेहतर कौन जान सकता है। उनकी एक नहीं, बल्कि तीन-तीन बेटियां हैं और तीनों बेटियों ने अपने दम पर एक प्रतिष्ठित मुकाम बनाकर अपने माता-पिता और कुल का नाम रोशन किया है। 

बड़ी बहिन प्राची शर्मा सिविल जज हैं जबकि उनसे छोटी निधि शर्मा जिला सह अभियोजन अधिकारी हैं तो फिर छोटी बहिन इति शर्मा उनसे कहां पीछे रहती। लोक सेवा आयोग की परीक्षा के कल जब परिणाम घोषित हुए तो शर्मा परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि उनकी सबसे छोटी बेटी इति शर्मा ने अपनी दो बड़ी बहिनों के पदचिन्हों पर चलकर जनपद पंचायत के सीईओ पद पर चयनित होने में सफलता प्राप्त की है। 

विपिन शर्मा के घर पर बधाईयां देने वालों का तांता लगा हुआ है वहीं उनके मोबाइल पर बधाई देने वालों की घंटियां रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। बधाई देने वालों में प्रदेश सरकार की मंत्री और स्थानीय विधायक यशोधरा राजे सिंधिया भी शामिल हैं जिन्होंने शर्मा परिवार को बधाई देते हुए कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं होती हैं। 

यह सत्य है कि हर माता-पिता की तरह विपिन शर्मा और उनकी धर्मपत्नी स्नेहलता शर्मा के मन मेें कहीं न कहीं बेटे की ललक रही है, लेकिन ईश्वर ने तो उनसे बेहतर उनके लिए सोच रखा था। प्राची के बाद निधि और इति शर्मा का जन्म हुआ। निधि जहां 30 वर्ष की हैं वहीं इति 24 वर्ष की हैं दोनों के बीच छह वर्ष का अंतराल रहा। अंतत: शर्मा दपत्ति की मनोकामना पूर्ण हुई और तीन वर्ष बाद सिद्धार्थ ने जन्म लिया। 

सिद्धार्थ भी अपनी तीनों बहिनों की तरह मेधावी है और इस वर्ष की लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उसका  प्रारंभिक और लिखित परीक्षा में चयन हो चुका है। साक्षात्कार के जरिये वह अपनी नियुक्ति से सिर्फ एक कदम पीछे है। विपिन शर्मा बताते हैं कि शुरू से ही उन्होंने बेटियों को बेटा मानकर उन पर ध्यान देना शुरू किया। 

अमूमन भारतीय माता-पिता कन्या जन्म के बाद उसके विवाह की चिंता में बचत शुरू कर देते हैं ताकि शादी में अर्थाभाव न आए, लेकिन उन्होंने बचत के स्थान पर अपनी बेटियों को बेहतर से बेहतर शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया। बेटियों ने भी अपने कैरियर पर ध्यान देना शुरू किया। पुत्रियों में शिक्षा में एक दूसरे से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रारंभ हुई जिसका परिणाम यह हुआ कि सबसे बड़ी प्राची और निधि सन् 2010 में एक साथ जिला सह अभियोजन अधिकारी (एडीपीओ) बनने में सफल रहीं। 

चयनित होने के बाद दोनों बहिनों ने पदभार भी ग्रहण कर लिया। निधि शर्मा इस समय नीमच में जिला सह अभियोजन अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं और उनके पति वहीं सिविल जज हैं। जबकि प्राची शर्मा इससे संतुष्ट नहीं हुईं और उसने सिविल जज बनने की ठान ली। एक बार असफल हुई, लेकिन निराश नहीं हुई। 

इसका परिणाम यह हुआ कि 2013 में प्राची सिविल जज बनने में सफल रहीं और वर्तमान में वह मुरैना में पदस्थ हैं जबकि उनके पति जौरा में एडीपीओ हैं। खास बात यह है कि दोनों बहिनों की शादी बहुत अच्छी तरीके से और आसानी से हो गई। 

प्राची और निधि का कहना है कि यह सब उनके दादा गोपालकृष्ण शर्मा (सेवानिवृत्त एकाउंट ऑफिसर) के आशीर्वाद और पिता विपिन शर्मा एवं माता स्नेहलता शर्मा की मेहनत के फलस्वरूप हुआ है। उनके दोनों चाचा संजय शर्मा और नीरज शर्मा तथा रिश्ते में चाचा अभिषेक शर्मा की सदभावना के फलस्वरूप ही उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। 
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