भाजपा में कितने दिन रह पायेंगें बीरेन्द्र ?

शिवपुरी। जब-जब चुनाव आयें है। तब- तब दोनो प्रमुख राजनैतिज्ञ दल कांग्रेस -भाजपा के नेताओ ने दल बदलें है। हाल ही में कांग्रेस के पूर्व विधायक बीरेन्द्र रघुवंशी ने कांग्रेस व सिंधिया का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। यही बजह है कि शहर में बीरेन्द्र रघुवंशी के राजनैतिक भविष्य की चर्चा अभी से होने लगी है।
यह बात सही है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गये पूर्व विधायक बीरेन्द्र रघुवंशी भाजपा में सिंधिया के खिलाफ विभीषण की भूमिका निभायेंगें? लेकिन वह भाजपा में कितने दिन बिता पायेंगें? यह सवाल उनके ऊॅपर प्रमुखता से बना हुआ है।

 कांग्रेस के शहर अध्यक्ष राकेश आमोल व कांग्रेस नेता मुकेश जैन ने दल बदल रहे नेताओ के संबंध में चर्चा करते हुये बताया है कि कांग्रेस पार्टी समुद्र है। इसमें कौन आ रहा है और कौन जा रहा है यह पता ही नही चलता है। उन्होने बताया है कि जिन नेताओ का कांग्रेस पार्टी में जन्म हुआ है उन नेताओ को दल बदलकर कांग्रेस से भाजपा में जाने के बाद उपेक्षाओ के अलावा कुछ नही मिलेगा। वहीं जो नेता पार्टी छोड़कर जा रहे है उनकी अपेक्षाए कहीं ज्यादा थी जिन्हें किसी भी स्तर पर पूरा नहीं किया जा सकता। दल बदलकर

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए कांग्रेस के अन्य नेताओ की चर्चा करे तो पूर्व में कांग्रेस से नाता तोड़कर भाजपा
मे शामिल हुये हरिवल्लभ शुक्ला, गणेश गौतम तथा एनपी शर्मा ने कुछ समय वाद ही पुन: कांग्रेस में आकर घर वापिसी की है। यह नेता चंद दिनो के लिये भाजपा में शामिल हुये लेकिन कुछ दिनो में ही गिले - शिकबे भुलाकर जल्द ही पार्टी के भीतर आ गये। वर्तमान में यह तीनो नेता कांग्रेस मे ही आकर अपना राजनैतिक भविष्य काट रहे है। इन सभी नेताओ के राजनैतिक सफर को देखते हुये यह कयास लगाए जा रहे है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए बीरेन्द्र कितने दिन भाजपा में निकाल पायेंगे।

महल विरोधी नेताओं को वापिसी में मिला बल
जितने भी कद्दावर कांग्रेसी नेता चाहें वह गणेश गौतम, हरिबल्लभ शुक्ला या फिर एनपी शर्मा सभी ने जमकर महल का विरोध किया तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया की खुले मंच से आलोचना की थी। जिसमें हरिबल्लभ शुक्ला ने तो सांसद सिंधिया के खिलाफ भाजपा के टिकट से लोकसभा चुनाव लड़ा था और सांसद सिंधिया की जीत का अंतर लाखों से हजारों में कर दिया था। इस खिलाफत के बाद यह तीनो नेता वापस कांग्रेस में आए और इनका कद पिछले बार की तुलना और अधिक बड़ गया। हो सकता है कि वीरेन्द्र रघुवंशी भी इसी चाह में कांग्रेस छोड़ भाजपा में पहुंचे हो।

इनका कहना है
-- कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में जितने भी नेता आए है वह हमारी पार्टी के सिद्धातों पर नहीं चल सके इसलिए वे भाजपा छोड़ वापस कांग्रेस में चले गए और अगर वीरेन्द्र भी पार्टी नीतियों पर नहीं चलेगे तो वे भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जा सकते है।
नरेन्द्र बिरथरे
पूर्व विधायक व गुना-शिवपुरी लोकसभा प्रभारी भाजपा ।
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