पवैया के खिलाफ भाजपा में चल रहा है 'असहयोग आन्दोलन'

राजू ग्वाल यादव/शिवपुरी। एक ओर सामंतवाद तो दूसरी ओर क्षेत्रीय की विधायक व प्रदेश मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ऐसे में कैसे भाजपा प्रत्याशी जयभान सिंह पवैया अपनी नैया पार लगाऐंगें, यह एक बड़ा सवाल आम जनमानस के मन में घूम रहा है।

आए दिन होने वाली आमसभाओं में खुलकर सामंतवाद का विरोध करने वाले पवैया को कहीं यह भारी ना पड़ जाए, इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। सूत्रों की  बातों पर गौर करें तो पता चलता है कि इस लोकसभा चुनाव में यशोधरा खेमा पूरी तरह से पवैया से दूरी बनाकर चुप्पी साधे हुए है।

कैसे बनाऐंगें देश में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री अब इस तरह के सवालों की चर्चाऐं भी होने लगी है। यदि कहीं भाजपा आपस में  ही बंटकर चुनावों से दूरी बना लें तो इसे भाजपाईयों का असहयोग ही कहेंगें जो कि जयभान सिंह पवैया को नहीं मिल पा रहा हो। भले ही जयभान सिंह मंच से दहाड़ते रहे सामंतवाद का विनाश करने के लिए वह यह चुनाव लड़ रहे है तो वहीं दूसरी ओर उन्हीं के इन बयानों की हवा वह भाजपाई उड़ा रहे है जो इस सामंतवाद के पैरों तलें दबे हुए है।

क्षेत्र की राजनीति में नए आयाम गढऩे का माद्दा पाले जयभान सिंह पवैया को पहले अपनों से ही मुकाबला करना होगा तब कहीं जाकर वह लोकसभा चुनावों में कुछ कर सकेंगें। यदि भरोसेमंदों की बातों पर गौर करें तो पता चलता है कि इस चुनाव में सर्वाधिक रूप से यदि खामियाजे के शिकार जयभान सिंह होंगें तो इसके लिए दोषी यशोधरा धड़ा ही होगा। आखिर एकजुटता की भरे मंच से जो मिसाल  जयभान सिंह भाजपा कार्यकर्ताओं को देते है वही मिसाल यहां पीछे नजर आती है।

गत दिवस आयोजित युवा मतदाता स मेलन में भी जयभान सिंह पवैया ने दम से हुंकार भरी और सामंतवाद के खिलाफ जमकर आग उगली, लेकिन इस आग की चपेट में वह भाजपाई कोसों दूर नजर आए जिन्हें यहां होना चाहिए थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि यह भाजपाई ही असल भाजपा की जड़ काटने में लग गए है।

बात यदि हो तो पोहरी विधायक प्रहलाद भारती की जो ना केवल इन दिनों नरेन्द्र सिंह तोमर के चुनाव को लेकर व्यस्तता का राग अलापते है तो वहीं दूसरी ओर वह शिवपुरी में मु यमंत्री आगमन के दौरान भी नदारद रहते है। ऐसे ही अन्य यशोधरा समर्थक भी है जो इन दिनों चुनावों से पूरी तरह दूरी बनाए हुए है। कहीं ऐसे में अपनों की मात का शिकार जयभान ना हो जाए इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। खासतौर से अब यशो समर्थकों ने जयभान से दूरी बनाने के लिए कई तरीके ईजाद किए है और इन तरीकों से वह भाजपाई चुनावों से दूरी भी बना लेंगें और जयभान सिंह को आईना भी दिखा देंगें।

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